- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 04:35
चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के चुनाव 29 जनवरी को होने जा रहे हैं, जिन्हें लेकर शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बार चुनाव की प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया गया है। पहले गुप्त मतदान के जरिए होने वाले इस चुनाव को अब हाथ खड़े कराकर कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को खत्म करना है, ताकि पार्षद खुलकर और पारदर्शी तरीके से अपना समर्थन जाहिर कर सकें। हालांकि, मतदान प्रक्रिया में बदलाव के बावजूद आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के सामने चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। दोनों दलों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने पार्षदों को भाजपा में शामिल होने से रोकना बन गई है। बीते कुछ समय में राजनीतिक दल-बदल की घटनाओं ने विपक्षी खेमे को कमजोर किया है, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता नजर आ रहा है।
गौरतलब है कि 2021 के नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 14 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का दावा किया था। इसके बावजूद पार्टी अब तक केवल एक बार ही मेयर पद हासिल कर पाई है। इससे यह सवाल भी उठता है कि संख्याबल होने के बावजूद AAP संगठनात्मक एकजुटता और रणनीतिक तालमेल बनाए रखने में कितनी सफल रही है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए चंडीगढ़ के AAP प्रभारी एसएस आहलूवालिया ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रभारी जरनैल सिंह के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में नगर निगम के पार्षदों की मौजूदा स्थिति, उनकी निष्ठा और हाल के दिनों में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में यह साफ तौर पर माना गया कि यदि पार्षदों को एकजुट नहीं रखा गया, तो आने वाले चुनावों में पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बताया जाता है कि जरनैल सिंह ने दो पार्षदों के भाजपा में चले जाने पर गहरी नाराजगी जाहिर की और इसे संगठन के लिए गंभीर चेतावनी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय सबसे ज्यादा जरूरी है कि बचे हुए पार्षद एकजुट रहें, आपसी मतभेद भुलाकर पार्टी लाइन पर चलें और भाजपा की रणनीति को नाकाम करें। साथ ही, उन्होंने नेतृत्व को जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाने और पार्षदों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने की सलाह भी दी।