Chandigarh News: चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड के लिए 2.52 करोड़ की परियोजना को मंजूर, 1.32 किमी लंबी ड्रेनेज लाइन बनेगी
Jun 18, 2026 10:54 AM
चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम ने डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाले जहरीले लीचेट के प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने बुधवार को नई ड्रेनेज लाइन परियोजना के लिए एजेंसी का चयन कर लिया। करीब 3 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना में 2.52 करोड़ रुपए की सबसे कम बोली को स्वीकृति दी गई है। अधिकारियों के अनुसार आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को कार्य सौंप दिया जाएगा। यह परियोजना डड्डूमाजरा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
डंपिंग ग्राउंड की परिधि में बनेगी नई ड्रेनेज लाइन
परियोजना के तहत डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की बाहरी सीमा के साथ 1.32 किलोमीटर लंबी दो नई ड्रेनेज लाइनें विकसित की जाएंगी। इनका मुख्य उद्देश्य कचरे के पहाड़ से रिसने वाले लीचेट को खुले में फैलने से रोकना है। नगर निगम के अनुसार यह व्यवस्था दूषित पानी को नियंत्रित तरीके से एकत्र करेगी और उसे उपचार प्रक्रिया के लिए निर्धारित संयंत्र तक पहुंचाएगी। इससे आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का खतरा कम करने में मदद मिलेगी।
नई ड्रेनेज लाइनें डंपिंग ग्राउंड से सटी दो प्रमुख सड़कों के किनारे बनाई जाएंगी। इनमें धनास मार्बल मार्केट और न्यू चंडीगढ़ की ओर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल है। इसके अलावा पटियाला की राव के साथ मालोया को जोड़ने वाली सड़क के आसपास भी ड्रेनेज नेटवर्क विकसित किया जाएगा। ये दोनों मार्ग चंडीगढ़ के महत्वपूर्ण यातायात मार्गों में गिने जाते हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं।
लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचेगा दूषित पानी
नगर निगम पहले ही डंपिंग ग्राउंड के उस हिस्से में एक ड्रेनेज लाइन तैयार कर चुका है, जो रिहायशी सेक्टरों की ओर स्थित है। अब नई ड्रेनेज लाइनें बनने के बाद डंपिंग ग्राउंड की तीनों सीमाओं से निकलने वाले लीचेट को एकत्रित किया जा सकेगा। इसके बाद यह दूषित पानी सीधे लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट (एलटीपी) तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसका वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा। इससे पर्यावरणीय प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सड़कों और यातायात सुरक्षा पर रहेगा सकारात्मक असर
अधिकारियों का कहना है कि डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाला जहरीला पानी आसपास की सड़कों की संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है। लगातार रिसाव होने से सड़क की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। धनास, मालोया और न्यू चंडीगढ़ मार्ग पर रोजाना हजारों वाहन और भारी ट्रक गुजरते हैं। ऐसे में लीचेट को नियंत्रित करना सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के संरक्षण के लिए जरूरी माना जा रहा है।
डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड लंबे समय से पर्यावरणीय चुनौतियों का केंद्र रहा है। नगर निगम का यह कदम कचरा प्रबंधन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लीचेट के नियंत्रित संग्रहण और उपचार से आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का खतरा कम होगा। साथ ही भविष्य में डंपिंग ग्राउंड से जुड़े पर्यावरणीय और बुनियादी ढांचे संबंधी जोखिमों को भी सीमित किया जा सकेगा।