- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 04:35
चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनावों की बहाली की मांग को लेकर चल रहा छात्रों का धरना वीरवार को 12वें दिन भी जारी रहा। लगातार दिनों के बीतने के बावजूद अब तक चुनाव शेड्यूल जारी नहीं किया गया है, जिससे छात्रों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। छात्रों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन आधिकारिक रूप से सीनेट चुनावों का लिखित शेड्यूल जारी नहीं करता, उनका शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। जानकारी के अनुसार, चुनाव कार्यक्रम उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, जो यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं, की मंजूरी के बाद ही घोषित होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार या शनिवार तक शेड्यूल जारी किया जा सकता है।
इस बीच, बीते कई दिनों से विभिन्न लोकतांत्रिक संगठनों, राजनीतिक नेताओं और सामाजिक समूहों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है। वीरवार को कई प्रमुख नेता—विधायक सुखपाल सिंह खैहरा, गुरकीरत सिंह कोटली (पूर्व कैबिनेट मंत्री, पंजाब), सरबजीत सिंह झिंगड़ (प्रधान, यूथ अकाली दल), गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना (कोऑर्डिनेटर, एसओआई), एडवोकेट भीम वरैच और एडवोकेट अमरजीत सिंह—ने धरना स्थल पहुंचकर छात्रों के संघर्ष को समर्थन दिया।
इसके अलावा सीनेटर डीपी रंधावा, नरिंदर शेरगिल (चेयरमैन, मिल्कफेड पंजाब), प्रदीप मल्होत्रा (उपाध्यक्ष, ट्रेड यूनियन पंजाब), गुरप्रीत सिंह (अकाली दल अमृतसर) और संत बाबा बंत सिंह जी (कर सेवा सिरसा) भी छात्रों के बीच पहुंचे। सभी नेताओं ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट व्यवस्था के ऐतिहासिक और कानूनी महत्व पर जोर देते हुए कहा कि चुनावों में देरी या उन्हें रोकना असंवैधानिक है। उन्होंने 10 नवंबर की तरह ही दोबारा छात्रों के संघर्ष को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया। वहीं, वीरवार को पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह भी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने छात्रों का समर्थन करते हुए मांग रखी कि चुनाव तिथियां तुरंत घोषित हों। साथ ही उन्होंने केंद्र और पंजाब सरकार पर तीखे शब्दों में हमला बोलते हुए कहा कि छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) के प्रदेश प्रधान सरदार जोगिंदर सिंह उग्राहां अपने साथियों के साथ धरने पर पहुंचे और छात्रों को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की जायज़ मांगें पूरी होने तक उनका संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा। धरने को मजबूती देने में आसपास के गांवों—न्यू चंडीगढ़, रानी मजरा, मोहाली और रोपड़ के कई इलाकों—के लोग भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीण रोजाना चाय, भोजन, दूध और अन्य सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही वे सफाई, व्यवस्था और अन्य कार्यों में भी छात्रों की मदद कर रहे हैं। लगातार बढ़ते समर्थन के बीच छात्रों का हौसला बुलंद है। उनकी एकजुटता और संकल्प ने आंदोलन को मजबूत बनाए रखा है। छात्र और समर्थक आश्वस्त हैं कि जल्द ही उनकी लोकतांत्रिक लड़ाई को जीत मिलेगी।
लंगर की ट्रॉली रोके जाने पर छात्रों और पुलिस में तीखी झड़प
पंजाब यूनिवर्सिटी में चल रहे प्रदर्शन के दौरान वीरवार को लंगर की ट्रॉली को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया। प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए रोजाना सेवादारों द्वारा लंगर पहुंचाया जाता है, लेकिन वीरवार को ट्रॉली को गेट नंबर 1 पर ही रोक दिया गया। जैसे ही इसकी जानकारी छात्रों तक पहुंची, वे मौके पर पहुंचे और पुलिस कर्मियों के साथ तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने पहले ट्रॉली को गेट नंबर 1 से वापस भेजकर गेट नंबर 3 से लंगर लाने को कहा, लेकिन वहां भी ट्रॉली रोक दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्र नेता पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाते और बहस करते दिखे। एक छात्र नेता ने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि लंगर ट्रॉली नहीं, ट्रक में भी आ जाएगा—अगर दम है तो रोककर दिखाएं। इसी दौरान छात्र नेता द्वारा पुलिस कर्मचारी से हाथापाई की कोशिश करने का आरोप भी सामने आया है।