- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 04:35
चंडीगढ़: लंबी खींचतान और लगातार 25 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद आखिरकार पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनावों को हरी झंडी मिल चुकी है। उपराष्ट्रपति, जो पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं, ने यूनिवर्सिटी द्वारा भेजे गए प्रस्तावित चुनाव शेड्यूल को मंजूरी दे दी है। इसकी आधिकारिक पुष्टि अवर सचिव सरिता चौहान द्वारा जारी पत्र में की गई है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि चुनाव वही शेड्यूल के अनुसार होंगे, जिसे 9 नवंबर को पंजाब यूनिवर्सिटी ने उपराष्ट्रपति कार्यालय को भेजा था।
सीनेट चुनावों की मंजूरी ऐसे समय आई है, जब यूनिवर्सिटी परिसर में छात्र संगठनों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों, विभिन्न किसान जत्थेबंदियों, पंजाब–हरियाणा–हिमाचल के राजनीतिक नेताओं और पंजाबी कलाकारों तक ने आंदोलन को खुला समर्थन दिया था। ‘पीयू बचाओ मोर्चा’ पिछले 25 दिनों से कैंपस में वीसी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठा था और मांग कर रहा था कि सरकार तत्काल सीनेट चुनावों की तारीखें घोषित करे। हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि 3 दिसंबर तक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया, तो वे चंडीगढ़ समेत पंजाब भर में भाजपा कार्यालयों का घेराव करेंगे। इससे पहले ही चुनावों को मंजूरी देकर उपराष्ट्रपति कार्यालय ने गतिरोध खत्म करने का संकेत दे दिया है।
उपराष्ट्रपति के अप्रूवल के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वह माननीय उपराष्ट्रपति एवं पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर के प्रति आभार प्रकट करती हैं, जिन्होंने सीनेट चुनावों को मंजूरी देकर सकारात्मक अकादमिक माहौल को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन हमेशा अपने छात्रों और शिक्षकों के साथ खड़ा रहा है और आगे भी उनके हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए काम करता रहेगा।
सात कांस्टीट्यूएंसीज से चुने जाएंगे 47 सदस्य
पंजाब यूनिवर्सिटी की नई सीनेट के लिए होने वाले चुनावों में कुल सात प्रकार की मतदाता श्रेणियाँ (कांस्टीट्यूएंसीज) शामिल की गई हैं, जिनसे मिलकर कुल 47 इलेक्टेड मेंबर्स चुने जाएंगे। इनमें सबसे बड़ा वर्ग रजिस्टर्ड ग्रेजुएट्स का है, जिनके लिए 15 सीटें निर्धारित हैं— जिनमें पंजाब से 2, चंडीगढ़ (यूटी) से 1 और ओपन कैटेगरी में 12 सीटें शामिल हैं। यूनिवर्सिटी के टीचिंग डिपार्टमेंट्स के प्रोफेसरों के लिए 2 सीटें रखी गई है, जबकि एसोसिएट प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए भी 2 सीटें तय की गई हैं— दोनों श्रेणियों में आर्ट्स और साइंस संकाय से एक-एक प्रतिनिधि चुना जाएगा।
इसके अलावा टेक्निकल और प्रोफेशनल कॉलेजों के प्रिंसिपलों तथा स्टाफ के लिए कुल 6 सीटें हैं, जिनमें पंजाब, यूटी और ओपन सभी श्रेणियों का प्रतिनिधित्व शामिल है। एफिलिएटेड आर्ट्स कॉलेजों के प्रिंसिपलों के लिए 8 सीटें निर्धारित हैं, जिनमें पंजाब की 3, यूटी की 1 और ओपन कैटेगरी की 4 सीटें शामिल हैं। इसी प्रकार एफिलिएटेड आर्ट्स कॉलेजों के प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए भी 8 सीटें रखी गई हैं। अंत में, यूनिवर्सिटी की विभिन्न फैकल्टीज़ के लिए 6 सीटें तय की गई हैं— जिनमें आर्ट्स, लैंग्वेजेज़, साइंस, मेडिकल साइंसेज और लॉ फैकल्टी से एक-एक प्रतिनिधि तथा शेष फैकल्टीज़ से एक संयुक्त प्रतिनिधि चुना जाएगा। इस प्रकार कुल 47 इलेक्टेड सीटें बनती हैं। शेष सीनेट में 36 नॉमिनेटेड मेंबर और एक्स-ऑफिशियो सदस्य शामिल होते हैं, जो कुल मिलाकर सीनेट की पूर्ण संरचना बनाते हैं।
छात्रों में जश्न की लहर, लेकिन विरोध अभी भी जारी
चुनाव शेड्यूल घोषित होने के तुरंत बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में जश्न का माहौल बन गया। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस जीत पर धरने पर बैठे छात्रों ने कैंपस में आतिशबाज़ी कर खुशी का इज़हार किया। कई जगहों पर पटाखे फोड़े गए और स्काईशॉट भी छोड़े गए, जिसे छात्रों ने ऐतिहासिक जीत का प्रतीक बताया। पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा ने भी इसे सीनेट चुनावों की तारीख़ों की घोषणा के रूप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा है। हालांकि मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है।
उनका कहना है कि कुछ अहम मुद्दों पर समाधान बाकी है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ एक बैठक तय की गई है, जिसमें वे तीन मुख्य मांगों को जोरदार तरीके से उठाएंगे। पहली मांग यह है कि पिछले सीनेट चुनाव विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई 14 छात्रों की एफआईआर को तुरंत रद्द किया जाए। दूसरी मांग नई एसओपी को पूरी तरह वापस लेने की है। तीसरी मांग हरियाणा कॉलेजों की पुनः संबद्धता पर विचार करने के लिए बनाई गई कमेटी को तत्काल भंग करने की है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, धरना जारी रहेगा।
पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट विवाद की समयरेखा
नेताओं ने कहा - छात्रों की एकजुटता ने बचाई पीयू की लोकतांत्रिक परंपरा
सीनेट चुनाव शेड्यूल घोषित होने के बाद पंजाब के कई प्रमुख नेताओं ने इसे छात्रों के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह जीत छात्रों, स्टाफ और पूर्व छात्रों की एकजुटता का परिणाम है। उन्होंने शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए सभी को बधाई देते हुए सोई की भूमिका की भी सराहना की। कांग्रेस नेता और जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह ने इस घोषणा को पंजाब के लोगों की जीत बताया और कहा कि अब पंजाबियों को चंडीगढ़ को अलग संघ-शासित क्षेत्र बनाने के केंद्र के प्रयासों का भी मजबूती से विरोध करना चाहिए।
कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने इसे पंजाब यूनिवर्सिटी और पूरे राज्य के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि छात्रों की प्रतिबद्धता ने यूनिवर्सिटी की लोकतांत्रिक परंपराओं को बचाया है। आम आदमी पार्टी के आनंदपुर साहिब सांसद मालविंदर कंग ने कहा कि देर से सही, लेकिन न्याय की जीत हुई है। उनके अनुसार पंजाब की एकजुटता ने यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता को बचाया और लोकतंत्र को फिर स्थापित किया। वहीं भाजपा नेता और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार हमेशा पंजाब के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करेगी। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और नए भारत के निर्माण में योगदान दें।