- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 04:35
चंडीगढ़: साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर सख्ती दिखाते हुए यूटी चंडीगढ़ की साइबर क्राइम पुलिस ने “ऑपरेशन म्यूल हंट” के तहत एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस अभियान के दौरान अलग-अलग मामलों में संलिप्त 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार ये आरोपी अपने बैंक खातों का इस्तेमाल “म्यूल अकाउंट” के रूप में कर रहे थे, जिनके जरिए साइबर ठगी से अर्जित धन को ट्रांसफर, निकासी और लेयरिंग के जरिए छिपाया जाता था। यह कार्रवाई साइबर क्राइम थाना, सेक्टर-17 में दर्ज कई एफआईआर की जांच के आधार पर की गई। कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम गीतांजलि खंडेलवाल (आइपीएस) के नेतृत्व में, डीएसपी साइबर क्राइम ए. वेंकटेश के मार्गदर्शन में और सेक्टर-17 स्थित साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर इरम रिजवी की देखरेख में की गई।
एसपी साइबर क्राइम ने सोमवार को सेक्टर-17 स्थित साइबर क्राइम थाने में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि यह पूरा ऑपरेशन एक सुव्यवस्थित रणनीति के तहत चलाया गया, जिसमें तकनीकी विश्लेषण और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की गई। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा युवाओं और आम लोगों को आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खातों का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसे रोकना पुलिस की प्राथमिकता है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई गृह मंत्रालय के आई4सी पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर की गई। जांच में सामने आया कि चंडीगढ़ क्षेत्र में संचालित कई बैंक खाते अन्य राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े हुए थे। इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट स्कैम, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश ठगी जैसे मामलों में किया जा रहा था। ठगी की रकम को पहले इन खातों में डाला जाता, फिर चेक, नकद निकासी या क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आगे ट्रांसफर किया जाता था। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनके खातों में अज्ञात लोगों द्वारा बड़ी रकम ट्रांसफर की जाती थी, जिसके बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था।
ऑपरेशन म्यूल हंट के तहत दर्ज एफआईआर का विवरण
एफआईआर नं. 11 : मामले की जांच के दौरान मौलीजागरां निवासी रितिक (22 वर्षीय), मौलीजागरां निवासी रिदम (20 वर्षीय) और एसएएस नगर, मोहाली निवासी आकाश (25 वर्षीय) के बैंक खाते संदिग्ध पाए गए। इन खातों के माध्यम से विवादित राशि ट्रांसफर की गई और चेक के जरिए निकासी की गई। जांच में आरोपी रितिक ने स्वीकार किया कि अज्ञात लोगों द्वारा उसके खाते में बड़ी रकम डाली जाती थी, जिसे बाद में क्रिप्टोकरेंसी (बायनेंस) में बदलकर ट्रांसफर किया गया या चेक से निकाला गया, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था। आरोपी आकाश ने भी माना कि उसने अपने खाते का इस्तेमाल क्रिप्टो लेनदेन के नाम पर होने दिया और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए।
एफआईआर नं 12. : यह एफआईआर में मौलीजागरां निवासी मोहम्मद दानिश (22 वर्षीय), सेक्टर-25 निवासी चारनदास (20 वर्षीय) और सेक्टर-41बी निवासी अर्चित (25 वर्षीय) के बैंक खाते संदिग्ध पाए गए। इन खातों के जरिए पहले लेयर-1 में विवादित राशि ट्रांसफर की गई और इसके बाद रकम को अन्य खातों में भेजा गया या निकाला गया। सभी आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते इस्तेमाल करने दिए।
एफआईआर नं 13 : मामले की जांच में बुड़ैल निवासी मोहम्मद तोशिक (26 वर्षीय) और फैदा निजामपुर निवासी दिलप्रीत सिंह (21 वर्षीय) के बैंक खाते सामने आए। इन खातों में भी अज्ञात लोगों द्वारा बड़ी रकम ट्रांसफर की गई, जिसे बाद में चेक के माध्यम से निकाला गया। जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें इसके बदले कमीशन मिलता था।
एफआईआर नं 109 : इसमें एसएएस नगर, मोहाली निवासी अंकित (23 वर्षीय) और चंडीगढ़ निवासी रोहन दुबे को आरोपी बनाया गया है। उसके बैंक खाते के माध्यम से 8.78 लाख रुपये की विवादित राशि ट्रांसफर और चेक के जरिए निकाली गई। जांच में आरोपी ने स्वीकार किया कि अज्ञात लोगों द्वारा उसके खाते में रकम डाली जाती थी और वह कमीशन के बदले निकासी करता था।