छत्तीसगढ़ हुआ नक्सल-मुक्त, राज्य के लिए है यह ऐतिहासिक दिन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
Mar 31, 2026 5:34 PM
रायुपर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को कहा कि 31 मार्च 2026 राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन बन गया है, क्योंकि इस दिन नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके संकल्प के चलते यह संभव हो पाया है।
बस्तर में विकास की नई शुरुआत
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय से छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है। उन्होंने बताया कि करीब 40 वर्षों तक यह क्षेत्र विकास से अछूता रहा, लेकिन अब यहां तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार की योजनाओं और सुरक्षा बलों के प्रयासों से बस्तर में शांति और विकास का नया दौर शुरू हो रहा है।
राहुल गांधी पर लगाए आरोप
इस दौरान साय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने कई स्थानों पर नक्सलियों से मुलाकात की और उनके साथ मंच साझा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर देश की जनता को सच्चाई समझनी चाहिए।
झीरम घाटी घटना का जिक्र
मुख्यमंत्री ने 2013 की झीरम घाटी हमला का भी उल्लेख किया, जिसमें कांग्रेस नेताओं समेत 32 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि उस समय विपक्ष में रहे नेताओं ने कई दावे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद वे उन दावों को साबित नहीं कर पाए। उन्होंने इस घटना को राज्य के इतिहास की बड़ी त्रासदी बताया।
सरकार की नीतियों का असर
साय ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीतियों और संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण कई युवा मुख्यधारा में लौटे हैं। उन्होंने बताया कि अब ये युवा अपने कौशल और मेहनत से नए अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे क्षेत्र में स्थायी शांति और सामाजिक संतुलन स्थापित हो रहा है।
‘नया बस्तर’ की परिकल्पना
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब भय और हिंसा से बाहर निकलकर विश्वास और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज गांव-गांव में विकास की रोशनी पहुंच रही है और लोगों के चेहरों पर डर की जगह आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। उन्होंने 31 मार्च 2026 को इस बदलाव का प्रतीक बताते हुए इसे नए छत्तीसगढ़ की शुरुआत बताया।