स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सीनियर बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली को लेकर बड़ा बयान दिया है। धोनी ने कहा कि किसी को भी यह तय करने का हक नहीं है कि कोई खिलाड़ी कब तक खेले। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई खिलाड़ी देश के लिए खेलना चाहता है और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो उसे रोका नहीं जाना चाहिए। धोनी के मुताबिक, क्रिकेट में फैसले भावनाओं से नहीं बल्कि मैदान पर किए गए प्रदर्शन से होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रोहित और कोहली जैसे खिलाड़ी टीम के लिए आज भी बेहद अहम हैं। ऐसे खिलाड़ियों का अनुभव किसी भी बड़े टूर्नामेंट में टीम को मजबूती देता है। धोनी ने माना कि इन दोनों खिलाड़ियों ने सालों तक भारत के लिए दबाव में शानदार प्रदर्शन किया है।



उम्र नहीं बल्कि प्रदर्शन और फिटनेस होनी चाहिए चयन की असली कसौटी

धोनी ने कहा कि उम्र को लेकर खिलाड़ियों पर सवाल उठाना गलत है। उनके अनुसार, क्रिकेट में उम्र नहीं बल्कि फिटनेस और प्रदर्शन सबसे बड़ा मापदंड होना चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी 35 या 38 साल की उम्र में भी फिट है और रन बना रहा है, तो उसे टीम से बाहर करने का कोई कारण नहीं है। धोनी ने याद दिलाया कि जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था, तब भी उम्र को लेकर कोई चर्चा नहीं होती थी। उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं को सिर्फ यह देखना चाहिए कि खिलाड़ी टीम के लिए कितना उपयोगी है। धोनी के अनुसार, फिट खिलाड़ी किसी भी उम्र में मैच जिता सकता है। यही सोच भारतीय क्रिकेट को आगे ले जा सकती है।



अनुभव ही बड़े मुकाबलों में टीम को संभालता है: धोनी

धोनी ने अनुभव की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी टीम वही होती है जिसमें अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हों। उन्होंने कहा कि अनुभव सिर्फ 20–25 मैच खेलने से नहीं आता। असली अनुभव तब बनता है जब खिलाड़ी लंबे समय तक दबाव में खेलता है। धोनी के मुताबिक, जब मैच फंसा होता है, तब अनुभवी खिलाड़ी ही टीम को सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ी जरूरी हैं, लेकिन अनुभव के बिना टीम अधूरी रहती है। धोनी ने यह भी कहा कि युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का सही संतुलन ही टीम को चैंपियन बनाता है।



चयन प्रक्रिया में सभी खिलाड़ियों के लिए समान नियम जरूरी

पूर्व कप्तान ने कहा कि टीम चयन में किसी भी खिलाड़ी के साथ अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। धोनी के अनुसार, चाहे खिलाड़ी सीनियर हो या जूनियर, नियम सबके लिए एक जैसे होने चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी फिट नहीं है या प्रदर्शन नहीं कर पा रहा, तो उसे बाहर बैठना होगा। वहीं, जो खिलाड़ी लगातार अच्छा खेल रहा है, उसे टीम में जगह मिलनी चाहिए। धोनी ने कहा कि इसी पारदर्शिता से टीम का माहौल अच्छा रहता है। इससे खिलाड़ियों में भरोसा बना रहता है और वे खुलकर प्रदर्शन कर पाते हैं।



घरेलू धरती पर टी20 विश्व कप में भारत की मजबूत दावेदारी

टी20 विश्व कप को लेकर धोनी ने भारतीय टीम को बेहद मजबूत बताया। उन्होंने कहा कि घरेलू मैदान पर खेलने का फायदा टीम इंडिया को जरूर मिलेगा। भारतीय खिलाड़ियों को पिच और हालात की अच्छी समझ है। धोनी ने कहा कि टीम के पास इस फॉर्मेट के विशेषज्ञ खिलाड़ी हैं, जो किसी भी परिस्थिति में मैच का रुख बदल सकते हैं। उन्होंने माना कि मौजूदा टीम संतुलित है और उसमें मैच जिताने की पूरी काबिलियत है। धोनी के अनुसार, अगर टीम अपनी रणनीति पर सही से अमल करे, तो भारत खिताब जीत सकता है।



ओस बन सकती है मैच में सबसे बड़ी चुनौती

धोनी ने ओस को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि ओस की वजह से मैच का पूरा खेल बदल सकता है। ओस आने पर गेंदबाजों और फील्डिंग करने वाली टीम को काफी मुश्किल होती है। धोनी के मुताबिक, ऐसे हालात में टॉस बहुत अहम हो जाता है। उन्होंने कहा कि ओस के कारण कई बार बेहतर टीम भी हार जाती है। धोनी ने माना कि टीम को ओस से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। तभी मुश्किल हालात में भी जीत हासिल की जा सकती है।



फिटनेस और जिम्मेदारी निभाना ही सफलता की कुंजी

धोनी ने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का फिट रहना सबसे जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी खिलाड़ी को चोट नहीं लगनी चाहिए। साथ ही, हर खिलाड़ी को जो जिम्मेदारी दी जाए, उसे पूरी ईमानदारी से निभाना होगा। धोनी के अनुसार, अगर हर खिलाड़ी अपनी भूमिका समझ ले, तो टीम को कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि अनुशासन, फिटनेस और टीमवर्क से ही बड़े टूर्नामेंट जीते जाते हैं। यही चीज भारतीय टीम को खतरनाक बनाती है।

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