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PWD का बड़ा एक्शन: 450 करोड़ से बदलेगी पश्चिमी दिल्ली की सूरत, आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचना होगा अब मिनटों का काम

Apr 09, 2026 3:26 PM

दिल्ली। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक और धुआं छोड़ते वाहनों की लंबी कतारों के बीच दिल्ली सरकार ने एक बड़ी राहत भरी योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। पश्चिमी दिल्ली से आईजीआई एयरपोर्ट और मध्य दिल्ली जाने वाले लोगों के लिए 'नजफगढ़ नाला रोड प्रोजेक्ट' किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है। पीडब्ल्यूडी (PWD) ने नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों को एक आधुनिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर में तब्दील करने की तैयारी कर ली है। करीब 450 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर काम शुरू हो चुका है, जो भविष्य में दिल्ली की लाइफलाइन साबित हो सकती है।

साढ़े 31 किलोमीटर का दोतरफा कॉरिडोर

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों पर लगभग 31.5-31.5 किलोमीटर लंबी सड़क विकसित की जाएगी। कुल 61 किलोमीटर के इस स्ट्रेच को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह न केवल चार पहिया वाहनों का बोझ कम करे, बल्कि पैदल चलने वालों और फिटनेस के शौकीनों के लिए भी सुरक्षित हो। सड़क के किनारे जॉगिंग ट्रैक और साइकिलिंग लेन बनाने का भी प्रावधान है, जो इसे दिल्ली की अन्य सड़कों से अलग और आधुनिक बनाएगा। इसके अलावा, ड्रेनेज सिस्टम और अत्याधुनिक स्ट्रीट लाइटों से पूरे इलाके की सूरत बदल जाएगी।

इन इलाकों की बदलेगी तकदीर: एयरपोर्ट की डगर होगी छोटी

यह नई सड़क दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रैफिक नेटवर्क—आउटर रिंग रोड, इनर रिंग रोड, पंखा रोड, नजफगढ़ रोड और अर्बन एक्सटेंशन रोड (UER-II)—को आपस में जोड़ने का एक महत्वपूर्ण 'लिंक' बनेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा नजफगढ़, द्वारका, उत्तम नगर, विकासपुरी, राजौरी गार्डन और पश्चिम विहार के निवासियों को होगा। वर्तमान में इन इलाकों से एयरपोर्ट जाने के लिए यात्रियों को धौला कुआं या द्वारका के भीड़भाड़ वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन इस नए विकल्प के तैयार होने के बाद सफर का समय काफी घट जाएगा।

ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए गेम चेंजर

दिल्ली सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद मौजूदा मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव करीब 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। यह कॉरिडोर एक 'बायपास' की तरह काम करेगा, जिससे भारी वाहनों और स्थानीय ट्रैफिक को अलग-अलग दिशाएं मिल सकेंगी। जानकारों की मानें तो पश्चिमी दिल्ली से नई दिल्ली और मध्य दिल्ली की ओर आवाजाही करने वालों के लिए यह सड़क एक किफायती और तेज विकल्प बनकर उभरेगी। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, डीपीआर फाइनल होते ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, ताकि समयबद्ध तरीके से इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जा सके।

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