Fertilizer Advance Booking: अब घर बैठे मोबाइल से बुक होगी यूरिया और डीएपी, सरकार ने लॉन्च किया FFS मोबाइल ऐप
Jun 10, 2026 2:27 PM
दिल्ली। फसल की बुवाई के वक्त यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसी खादों के लिए सहकारी समितियों और निजी दुकानों के बाहर लगने वाली किसानों की भारी भीड़ अब गुजरे जमाने की बात होने वाली है। केंद्र सरकार ने खाद वितरण की पूरी व्यवस्था को डिजिटल और बेहद सुगम बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार द्वारा तैयार किए गए इस नए मोबाइल ऐप के जरिए अब खाद की कालाबाजारी पर तो रोक लगेगी ही, साथ ही किसानों को सही कीमत पर और सही समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। उत्तर प्रदेश के रामपुर और सीतापुर के किसानों को सबसे पहले इस सुविधा का लाभ मिलने जा रहा है।
मोबाइल पर दिखेगा खाद का पूरा हिसाब-किताब
'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' यानी एफएफएस (FFS) नाम की इस नई डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से बाजार में होने वाली खाद की कृत्रिम किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इस ऐप के जरिए कोई भी किसान अपने ब्लॉक या गांव के आसपास के पंजीकृत खाद विक्रेताओं के गोदामों में मौजूद लाइव स्टॉक की सटीक जानकारी हासिल कर सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों को बिना वजह दुकानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वे अपनी जरूरत के हिसाब से पहले ही खाद की एडवांस बुकिंग कर सकेंगे।
जानिए कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम
सरकार की इस योजना के मुताबिक, किसानों को इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठाने के लिए ऐप में अपनी किसान पहचान संख्या या अपने सरकारी पहचान पत्र (जैसे आधार नंबर) के जरिए लॉगिन करना होगा। ऐप के भीतर जाते ही उनके सामने नजदीकी खाद विक्रेताओं की सूची और वहां मौजूद यूरिया-डीएपी की बोरियों की संख्या दिखाई देगी। किसान अपनी जरूरत के मुताबिक खाद का कोटा सिलेक्ट कर उसे रिजर्व कर सकेंगे। बुकिंग कन्फर्म होते ही मोबाइल स्क्रीन पर एक कस्टमाइज्ड बुकिंग नंबर और एक क्यूआर (QR) कोड जेनरेट होगा। किसान को बस अपनी चुनी हुई दुकान पर जाकर वह क्यूआर कोड दिखाना होगा और बिना किसी देरी के उनकी आरक्षित खाद उन्हें सौंप दी जाएगी।
पारदर्शिता बढ़ेगी, पूरे देश में लागू करने की तैयारी
इस नई व्यवस्था से न सिर्फ किसानों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि पूरी खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल सर्वर पर दर्ज होने से सिस्टम में पारदर्शिता आएगी। इससे बिचौलिए और जमाखोर खाद की अवैध डंपिंग नहीं कर पाएंगे। कृषि विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट वाले जिलों के किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी किसान आईडी और मोबाइल नंबर को अपडेट रखें ताकि ऐप संचालन में कोई दिक्कत न आए। रामपुर और सीतापुर में इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे सफल रहने के बाद, केंद्र सरकार इस कड़क और पारदर्शी व्यवस्था को हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य सभी राज्यों में भी अनिवार्य रूप से लागू करने की योजना बना रही है।