Friday, Jan 2, 2026

लुधियाना के उद्योगपति एस.पी. ओसवाल से जुड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में ईडी ने एक और आरोपी पकड़ा


27 views

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि लुधियाना के जाने-माने उद्योगपति एस.पी. ओसवाल से जुड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में धन शोधन की जांच के सिलसिले में दूसरी गिरफ्तारी की गई है। ईडी ने बताया कि अर्पित राठौर को 31 दिसंबर को कानपुर से उसके ठिकानों पर छापेमारी करने के बाद हिरासत में लिया गया। एजेंसी के अनुसार, राठौर ने न केवल ओसवाल को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने में बल्कि कई अन्य साइबर अपराधों और निर्दोष लोगों को निशाना बनाकर की गई धोखाधड़ी में भी “महत्वपूर्ण” भूमिका निभाई थी। तलाशी के दौरान एजेंसी ने कुछ डिजिटल उपकरण और 14 लाख रुपये जब्त किए। ईडी ने एक बयान में कहा कि जांलधर में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत ने राठौर को पांच जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।


एजेंसी ने बताया कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी 23 दिसंबर को असम से रूमी कलिता को हिरासत में लेने के बाद की गई थी। कलिता फिलहाल ईडी की हिरासत में है। धन शोधन का यह मामला लुधियाना पुलिस की एक प्राथमिकी से जुड़ा है। एजेंसियों के अनुसार, वर्धमान समूह के चेयरमैन एस.पी. ओसवाल को अगस्त 2023 में जालसाजों ने खुद को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया था और उनसे सात करोड़ रुपये की ‘‘जबरन वसूली’’ की थी। ईडी ने आरोप लगाया, ‘‘राठौर इन अपराधों को अंजाम देने के लिए विदेशी सहयोगियों के संपर्क में था और उन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ उपलब्ध कराकर तथा अवैध कमाई को विदेशी क्षेत्रों में अंतरित करने में मदद करता था।’’


इसने आरोप लगाया, ‘‘इसके बदले में विदेशी नागरिकों ने राठौर को भुगतान किया और साइबर अपराध से अर्जित रकम को विदेश भेजने के लिए इन खातों का इस्तेमाल किया।’’ एजेंसी ने दावा किया कि राठौर को अपराध से अर्जित आय में से उसका हिस्सा ‘यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी’ और भारतीय रुपये के रूप में मिला। ईडी के अनुसार, इसी गिरोह ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ और अन्य साइबर धोखाधड़ी के जरिये अन्य लोगों से 1.73 करोड़ रुपये की ठगी भी की। ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का तरीका है। ऐसे मामलों में ठग खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों को ऑडियो या वीडियो कॉल करके डराते हैं और उन्हें उनके घर में डिजिटल तौर पर बंधक बना लेते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कानूनी नहीं है और ऐसे किसी भी मामले में लोगों को तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

author

Vinita Kohli

लुधियाना के उद्योगपति एस.पी. ओसवाल से जुड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में ईडी ने एक और आरोपी पकड़ा

Please Login to comment in the post!

you may also like