LPG सिलेंडर पर सरकार का बड़ा फैसला: अब इन लोगों को नहीं मिलेगी गैस रिफिल, चेक करें लिस्ट
Mar 16, 2026 12:33 PM
दिल्ली। देश के मेट्रो शहरों और तेजी से विकसित होते शहरी इलाकों में जहां पाइप के जरिए रसोई गैस पहुंच चुकी है, वहां अब एलपीजी सिलेंडर के दिन लदने वाले हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक अहम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अब घरेलू सिलेंडर नहीं दिया जाएगा। सरकार का यह कदम उस 'बैकअप' कल्चर को खत्म करने की दिशा में है, जिसमें लोग पीएनजी होने के बावजूद घर में एक अतिरिक्त सिलेंडर भरकर रखते थे। इस नई व्यवस्था से उन करोड़ों उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा जो दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में दोहरी सुविधाओं का लाभ ले रहे थे।
संसाधनों का सही बंटवारा: क्यों पड़ी इस पाबंदी की जरूरत?
दरअसल, पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू मांग के बीच संतुलन बनाने में गैस कंपनियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सरकार का तर्क है कि जिन इलाकों में गैस पाइपलाइन का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है, वहां सिलेंडर की खपत अनावश्यक है। इन सिलेंडरों को उन ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जा सकता है जहां अभी तक पाइपलाइन नहीं पहुंची है। संसाधनों के इस बेहतर प्रबंधन से न केवल गैस की किल्लत दूर होगी, बल्कि वेटिंग लिस्ट में चल रहे जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सप्लाई समय पर पहुंच सकेगी। मंत्रालय का मानना है कि प्रभावी वितरण प्रणाली के लिए उन लोगों को सिलेंडर छोड़ना ही होगा जिनके पास पीएनजी का विकल्प मौजूद है।
सरेंडर करने पर राहत, लेकिन नियमों की अनदेखी पड़ेगी भारी
सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए यह भी साफ किया है कि यदि कोई उपभोक्ता स्वेच्छा से अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करता है, तो उससे किसी भी प्रकार का जुर्माना या पेनाल्टी नहीं वसूली जाएगी। सरेंडर की प्रक्रिया को भी बेहद सरल बनाया गया है। हालांकि, आदेश में यह चेतावनी भी छिपी है कि यदि कोई उपभोक्ता जानकारी छिपाकर दोनों कनेक्शन का इस्तेमाल जारी रखता है, तो तेल कंपनियां उसका कनेक्शन काटने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी कर सकती हैं। सरकारी तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने डेटाबेस को पीएनजी कंपनियों के साथ साझा करें ताकि दोहरे कनेक्शन वाले ग्राहकों की पहचान की जा सके।
क्या होगा आम आदमी पर असर?
इस फैसले से उन मध्यमवर्गीय परिवारों को अपनी आदत बदलनी होगी जो पीएनजी में गैस का दबाव कम होने या मेंटेनेंस के डर से सिलेंडर को सुरक्षित विकल्प मानते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से कालाबाजारी पर भी लगाम लगेगी क्योंकि अक्सर दोहरे कनेक्शन वाले सिलेंडर अनाधिकृत रूप से कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बाजार में पहुंच जाते थे। कुल मिलाकर, सरकार का यह मास्टरप्लान 'वन हाउस, वन कनेक्शन' की नीति को मजबूती देने वाला है, जिससे भविष्य में गैस आपूर्ति की किल्लत को जड़ से खत्म किया जा सके।