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PM Kisan 22nd Installment: किसानों को जल्द मिल सकती है अगली किस्त, जानें कब खाते में आएंगे 2000 रुपये

Mar 11, 2026 12:22 PM

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली अगली किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार जल्द ही पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त जारी कर सकती है। देशभर के करोड़ों किसान इस भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इस योजना के तहत हर चार महीने में 2000 रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं।

हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों के छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह रकम खेती के छोटे खर्चों में मदद करती है। इसलिए किस्त जारी होने की तारीख को लेकर किसानों की नजर लगातार सरकारी अपडेट पर बनी हुई है।

अब तक किसानों को मिल चुकी हैं 21 किस्तें

सरकार इस योजना के तहत अब तक किसानों के खातों में 21 किस्तें ट्रांसफर कर चुकी है। 21वीं किस्त 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर से जारी की थी।

उस समय 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में करीब 18 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। योजना शुरू होने के बाद से अब तक किसानों को 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी जा चुकी है।

कब आ सकती है 22वीं किस्त

सरकारी जानकारी के अनुसार पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त इसी महीने जारी होने की संभावना है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।

ऐसे में किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपना लाभार्थी स्टेटस, बैंक खाता और e-KYC की स्थिति जरूर जांच लें, ताकि किस्त आने में किसी तरह की दिक्कत न हो।

कैसे मिलती है योजना की रकम

पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में दी जाती है।

सरकार हर चार महीने में 2000 रुपये की किस्त सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजती है। आमतौर पर पहली किस्त अप्रैल में, दूसरी अगस्त में और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी की जाती है।

किन किसानों को मिलता है योजना का लाभ

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए किसान का भारत का नागरिक होना जरूरी है। इसके साथ ही किसान के पास खेती योग्य जमीन होना भी आवश्यक है।

यह योजना मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए बनाई गई है, ताकि उन्हें खेती के खर्चों में कुछ आर्थिक सहायता मिल सके।

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