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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत देने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई

Mar 27, 2026 6:26 PM

नयी दिल्ली: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पॉक्सो मामले में अग्रिम जमानत देने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की गई है।

मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की इस अपील में 25 मार्च के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि अदालत ने स्वामी पर लगे आरोपों की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया। याचिका में यह भी कहा गया है कि सरस्वती गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को अग्रिम जमानत देते हुए यह भी कहा था कि जांच बिना किसी बाहरी प्रभाव के जारी रहनी चाहिए।

इससे पहले 27 फरवरी को, अदालत ने सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और निर्देश दिया था कि नाबालिग बच्चों के कथित यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों से जुड़े इस मामले में आदेश सुनाए जाने तक उन्हें हिरासत में नहीं लिया जाएगा

अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और याचिकाकर्ताओं को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने कई ‘बटुकों’ (युवा शिष्यों) का यौन शोषण किया।

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