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25 जून को निर्जला एकादशी पर 4 शुभ संयोग, जानिए पूजा का सही मुहूर्त और पारण का समय

Jun 16, 2026 11:28 AM

सनातन परंपरा में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, लेकिन इनमें सबसे कठिन और सर्वोच्च स्थान 'निर्जला एकादशी' को दिया गया है। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी के दौरान तपती और झुलसाने वाली गर्मी में बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो श्रद्धालु वर्ष भर पड़ने वाली सभी 24 एकादशियों का व्रत करने में असमर्थ हैं, वे यदि केवल निर्जला एकादशी का उपवास पूरी निष्ठा से रख लें, तो उन्हें साल भर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिल जाता है।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, महाभारत काल में वेद व्यास जी की सलाह पर परम प्रतापी भीमसेन ने भूख पर नियंत्रण न रख पाने की विवशता के कारण इस एकमात्र एकादशी का व्रत रखा था। इसी वजह से लोकमानस में इसे 'भीमसेनी एकादशी' या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत के प्रभाव से न केवल जीवन के सारे कष्ट मिटते हैं, बल्कि भगवान विष्णु की कृपा से अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

चार दुर्लभ संयोगों का अनूठा ताना-बाना

वर्ष 2026 की निर्जला एकादशी ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद कल्याणकारी मानी जा रही है। इस दिन एक साथ चार शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, 25 जून को सूर्योदय के साथ ही यानी सुबह 05:25 बजे से रवि योग शुरू हो जाएगा, जो शाम को 04:29 बजे तक रहेगा। शास्त्रों में रवि योग को सभी प्रकार के अनिष्ट और दोषों को नष्ट करने वाला माना गया है।

इसके साथ ही, सुबह 10:54 बजे तक 'शिव योग' रहेगा और उसके तुरंत बाद 'सिद्ध योग' की शुरुआत हो जाएगी, जो अगले दिन 26 जून को सुबह 11:36 बजे तक रहेगा। सोने पर सुहागा यह है कि इस बार एकादशी गुरुवार के दिन पड़ रही है। गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए ही समर्पित है, जिससे इस व्रत का फल कई गुना बढ़ गया है।

भद्रा का साया, पर डरने की जरूरत नहीं

इस बार एकादशी के दिन भद्रा का साया भी रहने वाला है। 25 जून को सुबह 07:08 बजे से लेकर रात 08:09 बजे तक भद्रा का काल रहेगा। आमतौर पर भद्रा को शुभ कार्यों में वर्जित माना जाता है, जिससे कई व्रतधारी पूजा को लेकर संशय में पड़ सकते हैं। परंतु ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि इस दिन भद्रा का वास 'पाताल लोक' में रहेगा। शास्त्रों के नियम के अनुसार, जब भद्रा पाताल या स्वर्ग लोक में होती है, तो पृथ्वी पर उसका कोई भी अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए श्रद्धालु बिना किसी भय के पूरे दिन भगवान विष्णु की पूजा-पाठ, नाम जप और मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

पूजा के शुभ मुहूर्त और पारण की समय-सारणी

पंचांग के मतभेदों को दूर करते हुए उदयातिथि के आधार पर 25 जून, गुरुवार को ही व्रत रखना शास्त्रसम्मत है। इस दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त सुबह 05:25 बजे से 07:10 बजे तक का रहेगा। इसके अलावा, जो लोग दोपहर में पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए लाभ और उन्नति का मुहूर्त दोपहर 12:24 बजे से 02:09 बजे तक खुला रहेगा। साधना के लिए विशेष माना जाने वाला ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:05 बजे से 04:45 बजे तक रहेगा, जबकि दोपहर का अभिजीत मुहूर्त 11:56 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा। ध्यान रहे कि दोपहर 02:09 बजे से शाम 03:53 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसमें कोई भी नया कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

व्रत का समापन यानी पारण अगले दिन 26 जून, शुक्रवार को किया जाएगा। पारण का सबसे सटीक और उत्तम समय सुबह 05:25 बजे से लेकर 08:13 बजे के बीच निश्चित किया गया है। इस समय अवधि में दान-पुण्य करने के बाद जल ग्रहण कर व्रत को पूर्ण किया जा सकता है।

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