आज सोमवती अमावस्या पर अपनों को भेजें ये भक्तिमय संदेश और कोट्स
Jun 15, 2026 10:57 AM
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का अपना एक अलग और गहरा महत्व है, लेकिन जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'सोमवती अमावस्या' कहा जाता है जो बेहद दुर्लभ और पुण्य फलदायी मानी जाती है। आज यानी 15 जून 2026, सोमवार को देश भर के घाटों और मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि इस खास दिन भगवान श्रीहरि विष्णु, जगत जननी माता लक्ष्मी और देवों के देव महादेव की संयुक्त पूजा-अर्चना करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और घर में रिद्धि-सिद्धि का वास होता है।
सौभाग्य की कामना और चंद्र दर्शन का नियम; बदल जाती है जीवन की दशा
यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए आत्मिक और धार्मिक रूप से बहुत मायने रखता है। आज के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख की प्राप्ति के लिए निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं। इस दिन पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करने का विधान है। हालांकि, ज्योतिषविदों का कहना है कि अमावस्या के व्रत में शुद्धता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है। बिना चंद्र दर्शन और उचित अर्घ्य के इस व्रत का फल पूरा नहीं मिलता, इसलिए शाम के वक्त चंद्रमा की मानसिक या दृश्य आराधना अनिवार्य मानी गई है।
अपनों को भेजें ये खास संदेश, इस पावन दिन की बढ़ाएं शोभा
इस पावन और भक्तिमय माहौल में यदि आप भी अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और शुभचिंतकों को बधाई संदेश भेजना चाहते हैं, तो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के लिए ये चुनिंदा और प्रभावी संदेश (Wishes & Quotes) आपके बेहद काम आ सकते हैं:
"सोमवती अमावस्या की पावन तिथि पर होती है जगत के पालनहार श्रीहरि की पूजा, उनकी भक्ति और आराधना के सिवा न कोई दूजा। आपको और आपके परिवार को सोमवती अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं!"
"पितरों का आशीष पाना है, तो आज का दिन है सबसे खास। तर्पण, दान और पुण्य से महकेगा आपका घर-आंगन और पास। सोमवती अमावस्या की बधाई!"
"नीलवर्ण की छवि तुम्हारी, तुम हो न्याय के देवता और ग्रह मंडल के बलिहारी। हे शनिदेव, आपके चरणों में शीश नवाए सारा संसार। सोमवती अमावस्या और शनि आराधना की मंगलकामनाएं!"
"गंगा मइया के पवित्र जल में लगाएं आस्था की डुबकी, मिटेंगे सारे कष्ट और मिलेगी जन्मों के पापों से मुक्ति। हर-हर गंगे! सोमवती अमावस्या की ढेरों शुभकामनाएं।"
"ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम। भगवान भोलेनाथ और सूर्यपुत्र शनिदेव की कृपा आप पर सदा बनी रहे।"