Somvati Amavasya 2026: जून में सोमवती अमावस्या का महासंयोग, जानें स्नान-दान की सही तारीख और शुभ मुहूर्त
Jun 14, 2026 1:57 PM
धर्म। सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि का अपना एक अलग और गहरा आध्यात्मिक महत्व है। लेकिन जून 2026 में आने वाली यह अमावस्या आम दिनों की तुलना में कहीं अधिक फलदायी और विशेष होने जा रही है। दरअसल, यह ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या है, और सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे 'सोमवती अमावस्या' का दुर्लभ गौरव मिला है। पंचांग के इस फेरबदल की वजह से श्रद्धालुओं के बीच इस बात को लेकर उलझन थी कि स्नान-दान की सही तारीख आज है या कल। ज्योतिषविदों ने साफ किया है कि इस बार पर्व का विस्तार दो दिनों तक रहेगा, जिसमें रात की साधना और सुबह का दान अलग-अलग दिन किया जाएगा।
उदया तिथि की वजह से 15 जून को मनेगा पर्व, आज रात होगी विशेष साधना
पंचांग के गणित को समझें तो ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि रविवार, 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर लग जाएगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी सोमवार, 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर होगा। चूंकि हिंदू धर्म में किसी भी व्रत, त्योहार या स्नान-दान के लिए सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) को ही आधार माना जाता है, इसलिए सोमवती अमावस्या का मुख्य पर्व, पवित्र स्नान और दान 15 जून को ही किया जाएगा। हालांकि, जो साधक अमावस्या की काली रात में तंत्र साधना, मंत्र जाप या गुप्त पूजा करते हैं, उनके लिए 14 जून की रात का समय सबसे उपयुक्त रहेगा।
भगवान विष्णु और शिव-पार्वती की कृपा पाने का इकलौता अवसर
यह अमावस्या इसलिए भी खास है क्योंकि यह अधिकमास के भीतर आ रही है, जो कि भगवान श्री हरि विष्णु का सबसे प्रिय महीना है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना करने से सारे पाप कट जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, सोमवार का दिन होने से इस पर देवों के देव महादेव और माता पार्वती का विशेष पहरा रहेगा। सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए पीपल के पेड़ की परिक्रमा करती हैं और व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस महासंयोग में की गई पूजा से पितृ दोष और आर्थिक तंगी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान से चमकेगी किस्मत, घर पर भी कर सकते हैं उपाय
15 जून को सुबह के समय पूजा और स्नान के लिए दो सबसे उत्तम मुहूर्त बन रहे हैं। पहला है ब्रह्म मुहूर्त, जो सुबह 04:04 बजे से शुरू होकर 04:44 बजे तक रहेगा। इस दौरान गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना साक्षात पुण्य कमाना है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद दोपहर के समय धार्मिक अनुष्ठानों के लिए 'अभिजीत मुहूर्त' सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान जरूरतमंदों को अन्न, काले तिल, वस्त्र और छतरी दान करना बेहद शुभ फल देता है।
क्या करें और किन गलतियों से पूरी तरह बचकर रहें
शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या के दिन पितरों की तृप्ति के लिए तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें काले तिल और फूल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करना चाहिए। शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना व्यापार और नौकरी में आ रही बाधाओं को दूर करता है।
इसके विपरीत, इस दिन कुछ सावधानियां बरतना भी बेहद जरूरी है। अमावस्या की तिथि को पूरी तरह सात्विक रहना चाहिए। घर में किसी भी तरह का कलह, क्रोध या विवाद नहीं होना चाहिए। इस दिन भूलकर भी बुजुर्गों या पितरों के प्रति मन में गलत विचार न लाएं और न ही किसी लाचार व्यक्ति का अपमान करें, अन्यथा पितृ देव रुष्ट हो सकते हैं।