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Punjab News: गुरदासपुर अस्पताल ग्रेनेड हमले में बड़ी सफलता, मुख्य आरोपी तरनतारन से गिरफ्तार, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात

Jun 03, 2026 10:55 AM

गुरदासपुर: पंजाब के गुरदासपुर जिले के कलानौर कस्बे में स्थित मुल्तानी अस्पताल पर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने घटना के कुछ घंटों के भीतर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान धर्मिंदर उर्फ तिंडी के रूप में हुई है, जो कलानौर थाना क्षेत्र के अगवान गांव का निवासी है। पुलिस के अनुसार वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई गई। फिलहाल उससे पूछताछ कर हमले के पीछे के मास्टरमाइंड, साजिश और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

15 मिनट तक अस्पताल के बाहर खड़ा रहा आरोपी

जांच में सामने आया है कि हमलावर वारदात को अंजाम देने से पहले करीब 15 मिनट तक अस्पताल के बाहर मौजूद रहा। उस समय ओपीडी में मरीजों और उनके परिजनों की अच्छी-खासी भीड़ थी। आरोपी ने कुछ समय तक हालात का जायजा लिया और फिर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की ओर बढ़ गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार इमरजेंसी क्षेत्र में उस समय बहुत कम लोग मौजूद थे। जैसे ही वहां से लोग हटे, आरोपी ने ग्रेनेड फेंक दिया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने ग्रेनेड को सीधे रिसेप्शन या भीड़ वाले हिस्से की बजाय एक किनारे की ओर फेंका, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

मंगलवार दोपहर हुआ था धमाका

घटना मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे की है। गुरदासपुर पुलिस को सूचना मिली कि कलानौर स्थित मुल्तानी अस्पताल में तेज धमाका हुआ है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, डीएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में अस्पताल की खिड़कियों के शीशे टूटे मिले और परिसर में विस्फोटक सामग्री के छर्रों के निशान भी पाए गए। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक नकाबपोश व्यक्ति अस्पताल के बाहर संदिग्ध रूप से घूमता दिखाई दे रहा था। अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया था कि वही व्यक्ति हमले में शामिल था। अब जांच के दौरान एक और CCTV फुटेज सामने आई है। इस वीडियो में आरोपी अस्पताल का दरवाजा खोलकर अंदर प्रवेश करता दिखाई देता है। फुटेज के अनुसार वह अस्पताल परिसर में ग्रेनेड फेंकने के बाद तेजी से मौके से फरार हो गया। इसी वीडियो ने जांच एजेंसियों को आरोपी की पहचान तक पहुंचने में मदद की।

फॉरेंसिक जांच में ग्रेनेड हमले की पुष्टि, आरोपी गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को घटनास्थल पर बुलाया। मौके से मिले सबूतों और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद पुष्टि हुई कि अस्पताल पर ग्रेनेड से हमला किया गया था। इसके बाद पंजाब पुलिस ने अलग-अलग जांच टीमों का गठन किया। तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्य और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है।

पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी धर्मिंदर उर्फ तिंडी को तरनतारन क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज है। हालांकि पुलिस ने अभी तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि आरोपी ने यह हमला किसके निर्देश पर किया था। जांच एजेंसियां उसके फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक खंगाल रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वारदात के पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

फिरौती और पुरानी धमकियों की भी जांच

गुरदासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आदित्य ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन को पिछले वर्ष एक धमकी भरा कॉल मिला था, जिस पर उस समय कानूनी कार्रवाई भी की गई थी। हालांकि हाल के महीनों में किसी नई धमकी की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या हमला फिरौती, धमकी या किसी अन्य आपराधिक मकसद से जुड़ा हुआ था। आरोपी से पूछताछ के आधार पर हमले की पूरी साजिश का खुलासा होने की उम्मीद है।

डॉक्टर ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

मुल्तानी अस्पताल के संचालक डॉ. एसपी सिंह मुल्तानी ने बताया कि धमाका दोपहर करीब 2:32 बजे हुआ था। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घटना ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

डॉ. मुल्तानी के अनुसार उन्हें पिछले वर्ष अगस्त और फिर अक्टूबर में धमकियां मिली थीं। उस समय कुछ अवधि के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन बाद में सुरक्षा हटा ली गई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में हर तरह के मरीज आते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान हर व्यक्ति की मंशा का अंदाजा लगाना संभव नहीं होता, इसलिए निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।

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