Haryana News: अब आम जनता भी खा सकेगी “जेल की रोटी”, अंबाला सेंट्रल जेल से शुरू हो रहा पायलट प्रोजेक्ट

अब आम जनता भी खा सकेगी "जेल की रोटी"
Haryana News: हरियाणा का जेल विभाग एक बेहद रोचक और सुधारात्मक योजना पर काम कर रहा है। प्रदेश में अब कैदियों के हाथों से बना शुद्ध और पौष्टिक खाना जेल की चारदीवारी से बाहर निकलकर आम जनता की थाली तक पहुंचेगा। जेल विभाग ने इस खास थाली का नाम “जेल की रोटी” रखा है। इस योजना का पहला चरण यानी पायलट प्रोजेक्ट अंबाला सेंट्रल जेल से शुरू होने जा रहा है। यहां जेल परिसर के बाहर विशेष कैंटीन तैयार की जा रही है, जहां नागरिक इस पौष्टिक भोजन का स्वाद ले सकेंगे।
फ्लिपकार्ट से होगा करार, घर बैठे मिलेगी ‘जेल की रोटी’
जेल प्रशासन का इरादा इस योजना को सिर्फ कैंटीन तक सीमित रखने का नहीं है। अंबाला में कैंटीन की शुरुआत के बाद इसकी होम डिलीवरी भी शुरू की जाएगी। इसके लिए ई-कॉमर्स और डिलीवरी प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित करने की योजना है। यदि अंबाला में यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसका विस्तार रोहतक, हिसार, गुरुग्राम और कुरुक्षेत्र समेत राज्य की अन्य सभी प्रमुख जेलों की कैंटीनों में किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ की तर्ज पर बनी योजना, लोकमान्यता को मिलेगी दिशा
भारतीय समाज में एक पुरानी लोकमान्यता रही है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से जेल का खाना या पानी पी लेता है, तो उस पर जेल जाने का दोष कट जाता है। जेल विभाग ने जनभावनाओं और मांग को ध्यान में रखते हुए इस योजना का ढांचा तैयार किया है। इससे पहले छत्तीसगढ़ की रायपुर सेंट्रल जेल में ऐसा सफल प्रयोग किया जा चुका है। अंबाला में भी पूरी पारदर्शिता और तय प्रक्रिया के तहत यह खाना काउंटर से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। मांग और खपत के आधार पर प्रतिदिन तैयार होने वाले पैकेटों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
मिलावट-मुक्त थाली, लागत का देना होगा केवल 10 फीसदी शुल्क
जेल अधिकारियों का दावा है कि कैदियों के लिए बनने वाला भोजन पूरी तरह से मिलावट-मुक्त और उच्च गुणवत्ता का होता है, क्योंकि जेल प्रशासन सीधे मंडी से शुद्ध अनाज, ताजी सब्जियां और गुणवत्तापूर्ण मसाले खरीदता है। जेल मैनुअल के मुताबिक, प्रति थाली 200 ग्राम आटा, 50 ग्राम चावल, दो तरह की सब्जियां, दाल और दही शामिल होगी। राहत की बात यह है कि जनता को इस गुणवत्तापूर्ण भोजन के लिए कोई व्यावसायिक कीमत नहीं चुकानी होगी; उन्हें लागत का महज 10 प्रतिशत हिस्सा ही देना होगा।
कमर्शियल लाभ नहीं, कैदियों का पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन है मकसद
हरियाणा के जेल महानिदेशक (DG) ए.एस. चावला के अनुसार, “आम जनता की ओर से जेल में बने भोजन और ब्रेड की काफी समय से मांग आ रही थी। इसी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मकसद मुनाफा कमाना बिल्कुल नहीं है। इसका असली उद्देश्य कैदियों को रचनात्मक कार्य में व्यस्त रखना, उन्हें कुकिंग का हुनर सिखाना और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। भोजन की बिक्री से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल एक विशेष वेलफेयर फंड में किया जाएगा, जिससे कैदियों के स्किल डेवलपमेंट और पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि रिहाई के बाद वे समाज में सम्मानजनक जीवन बिता सकें।
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