भूपेंद्र हुड्डा को बड़ी जीत: AJL केस में ED कोर्ट ने किया डिस्चार्ज, खत्म हुई सालों की कानूनी लड़ाई
Apr 03, 2026 2:44 PM
हरियाणा। पंचकूला के सेक्टर-6 में करीब 3,360 वर्ग मीटर का एक सरकारी प्लॉट, जो 1982 में आवंटित हुआ था और बाद में रद्द हो गया था, उसे 2005 में दोबारा आवंटित करने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के पदेन अध्यक्ष भी थे। आरोप था कि हुड्डा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर यह प्लॉट दोबारा AJL को आवंटित किया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
कानूनी जंग और अदालती रुख
हुड्डा के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी थी कि आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह नियम सम्मत थी और इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ। बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन (आरोप मुक्त करने की अर्जी) लगाई गई थी। हुड्डा के कानूनी सलाहकार ने फैसले के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, "यह मामला कई सालों से सीबीआई और ईडी की अदालतों में खिंच रहा था। पहले सीबीआई के मामले में हमें राहत मिली थी और अब ईडी कोर्ट ने भी तथ्यों को देखने के बाद दोनों नेताओं को डिस्चार्ज कर दिया है। अब उनके खिलाफ इस मामले में कोई कानूनी कार्यवाही लंबित नहीं है।"
सियासी मायने: हुड्डा का कद और बढ़ेगा
पिछले कुछ वर्षों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस मामले को लेकर कांग्रेस और हुड्डा पर भ्रष्टाचार के तीखे हमले करती रही है। अब कोर्ट से मिली इस दोहरी राहत के बाद हुड्डा न केवल कानूनी रूप से सुरक्षित हुए हैं, बल्कि सियासी तौर पर भी उन्हें हमलावर होने का मौका मिल गया है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह फैसला साबित करता है कि हुड्डा के खिलाफ मामले केवल 'राजनीतिक प्रतिशोध' की भावना से बनाए गए थे।
पंचकूला सेक्टर-6 का वो विवादित प्लॉट
गौरतलब है कि ईडी ने इस मामले में हुड्डा और वोरा की करोड़ों रुपये की संपत्ति भी कुर्क की थी। जांच एजेंसी का दावा था कि प्लॉट के पुनः आवंटन से अवैध तरीके से लाभ कमाया गया। हालांकि, अदालत ने दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर पाया कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार नहीं हैं।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पंचकूला कोर्ट परिसर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस निर्णय के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की गुंजाइश बनी हुई है, लेकिन फिलहाल के लिए हुड्डा ने एक बड़ी जंग जीत ली है।