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CBI Action: 5000 करोड़ के घोटाले में राहत के लिए मांगी 3 करोड़ की घूस, हरियाणा कैडर के IPS अफसर को सीबीआई का समन

Jun 14, 2026 4:06 PM

हरियाणा। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के एक बेहद संगीन मामले में हरियाणा कैडर के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी की घेराबंदी शुरू कर दी है। आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसी के ही नाम और रसूख का इस्तेमाल कर एक बड़े घोटालेबाज को क्लीन चिट दिलाने का सौदा किया जा रहा था। इस 'डील' की कुल कीमत 3 करोड़ रुपये तय हुई थी। सीबीआई ने इस सिलसिले में संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है, जिससे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

पुडुचेरी के नकली दवा घोटाले से जुड़े हैं तार, डीजीसीए में तैनात हैं अधिकारी

सीबीआई सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शिकंजे में आए आईपीएस अधिकारी 2012 बैच के हैं और वर्तमान में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) में क्षेत्रीय निदेशक के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुडुचेरी के चर्चित 5,000 करोड़ रुपये के जाली और नकली दवा घोटाले के मुख्य आरोपी एन. राजा उर्फ राजशेखर से संपर्क साधा था। अधिकारी ने कथित तौर पर दावा किया था कि सीबीआई में उनकी ऊंची पहुंच है और वे इस पूरे मामले को रफा-दफा करवा सकते हैं।

दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर से लेकर बिचौलियों तक पर केस, 8 जून को दर्ज हुई एफआईआर

इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए सीबीआई ने बीते 8 जून को एक विस्तृत एफआईआर दर्ज की है। इस मुकदमे में घोटाले के मुख्य आरोपी एन. राजा के अलावा दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह, एक कथित बिचौलिए राजकुमार उर्फ मधनराज और कुछ अन्य अज्ञात लोक सेवकों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची थी, जिसका मकसद सीबीआई की समानांतर जांच को प्रभावित करना और आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाना था।

कड़ियों को जोड़ने में जुटी एजेंसी, हवाला के जरिए एडवांस भुगतान का दावा

इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पैसों के लेनदेन के तरीकों को लेकर हुआ है। सीबीआई की शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि रिश्वत की इस मोटी रकम को ठिकाने लगाने के लिए बकायदा हवाला नेटवर्क का सहारा लिया गया था। एजेंसी का दावा है कि 3 करोड़ रुपये की कुल डील में से करीब 1 करोड़ रुपये की पहली किस्त (एडवांस) पहले ही तय ठिकाने पर पहुंचाई जा चुकी थी। अब सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा इस पूरे मनी ट्रेल (धन के प्रवाह) और हवाला ऑपरेटरों के सिंडिकेट को खंगालने में जुटी है।

अभी 'आरोपी' नहीं, लेकिन बढ़ेगी कड़ाई; कानूनी जानकारों की नजरें टिकीं

सीबीआई ने इस पूरे घटनाक्रम से संबंधित विभाग को आधिकारिक तौर पर अवगत करा दिया है। फिलहाल अधिकारी से यह उगलवाने की कोशिश की जा रही है कि क्या उन्होंने वाकई अपने रसूख का इस्तेमाल किया था या फिर यह सिर्फ पैसों की उगाही का एक जरिया था।

कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो भले ही सीबीआई ने अभी अधिकारी को सीधे तौर पर मुख्य आरोपी घोषित न किया हो, लेकिन अगर पूछताछ के दौरान आर्थिक लेनदेन के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराओं के तहत गाज गिरना तय है। फिलहाल, दिल्ली से लेकर हरियाणा तक की ब्यूरोक्रेसी इस जांच के अगले कदम पर नजरें गड़ाए बैठी है।

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