Haryana Bank Scam: 590 करोड़ के घोटाले में IAS की गिरफ्तारी तय? CBI ने 4 घंटे तक खंगाले राज
May 20, 2026 9:57 AM
हरियाणा। हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में इस समय भूचाल आया हुआ है। राज्य के 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में सीबीआई ने अपना शिकंजा बेहद कस दिया है। जांच एजेंसी की टीम ने मंगलवार को दो सीनियर आईएएस अधिकारियों को तलब किया और करीब चार घंटे तक उनसे सघन पूछताछ की। सूत्रों की मानें तो जांच इस मोड़ पर पहुंच चुकी है कि इनमें से एक आईएएस अधिकारी को सीबीआई किसी भी वक्त गिरफ्तार कर सकती है। इस अधिकारी के बैंक कर्मचारियों के साथ सीधे वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सुराग हाथ लगे हैं।
मोबाइल चैट ने खोली पोल, बेनामी संपत्तियों में खपाया गया सरकारी पैसा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट संदिग्ध अधिकारियों के जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस बने हैं। जांच एजेंसी ने पिछले दिनों दो अफसरों के मोबाइल फोन जब्त किए थे। फॉरेंसिक लैब की मदद से जब इन फोनों का डिलीटेड डेटा, व्हाट्सएप चैट्स और एन्क्रिप्टेड कॉल्स का बैकअप निकाला गया, तो सीबीआई के हाथ कई चौंकाने वाले सबूत लगे। इन चैट्स से साफ जाहिर होता है कि सरकारी फंड को नियमों को ताक पर रखकर निजी बैंकों में जमा कराने के बदले मोटी रकम का हेरफेर हुआ था। यही नहीं, घोटाले की इस काली कमाई को बेनामी संपत्तियों और हवाला के जरिए ठिकाने लगाने के सबूत भी मिले हैं।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में बड़े चेहरों के नाम, फोरेंसिक जांच जारी
यह घोटाला सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इसमें पुख्ता डिजिटल सबूत भी शामिल हो चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों के बयानों, फाइल मूवमेंट और कुछ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग से कई अन्य बड़े चेहरों के नाम सामने आ रहे हैं। इस रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर सरकारी फंड को ट्रांसफर करने, बैंक खातों को मनमाने तरीके से संचालित करने और पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई से बचने के तौर-तरीकों पर चर्चा की जा रही है। सीबीआई अब इन सभी ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच करा रही है ताकि कोर्ट में इन्हें अकाट्य सबूत के तौर पर पेश किया जा सके।
धारा 17-ए की मंजूरी से मचा हड़कंप, रडार पर और भी कई चेहरे
यह पहला मौका है जब हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी में इतने बड़े स्तर पर आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी हुई है। अब तक पांच आईएएस और एक अन्य अधिकारी से पूछताछ हो चुकी है, जो पंचायत विभाग और हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम में तैनात रहे हैं।
सरकार ने 8 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ पहले ही धारा 17-ए के तहत जांच की मंजूरी दे दी थी, वहीं अब दो और अधिकारियों (जिनमें एक वरिष्ठ आईएएस और एक एचसीएस अधिकारी शामिल हैं) के खिलाफ भी 17-ए की मंजूरी लेने की कवायद शुरू हो गई है।
भ्रष्टाचार पर सीएम सैनी का कड़ा रुख, आर-पार के मूड में सरकार
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस महाघोटाले का खुलासा होते ही पहले इसकी कमान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपी थी, लेकिन मामले की गंभीरता और इसकी कड़ियां अन्य राज्यों से जुड़े होने के कारण जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई। आठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन और जांच की मंजूरी देकर सरकार ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। सचिवालय के गलियारों में दबी जुबान में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।