हरियाणा में घर खरीदना हुआ महंगा: कैबिनेट ने किफायती आवास नीति में 12% तक बढ़ोतरी को दी मंजूरी
Mar 25, 2026 4:46 PM
हरियाणा। चंडीगढ़ में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में हरियाणा सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर और बिल्डरों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि किफायती आवास परियोजनाओं को व्यावहारिक (Viable) बनाए रखने और निर्माण लागत में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए दरों में संशोधन जरूरी था। सरकार का तर्क है कि इस कदम से रुके हुए प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी, लेकिन सीधा असर उन आम खरीदारों पर पड़ेगा जो कम बजट में घर की उम्मीद लगाए बैठे थे।
शहरों के हिसाब से नई दरों का गणित
संशोधित नीति के तहत प्रदेश के शहरों को उनकी क्षमता (Potential) के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। सबसे ज्यादा मार गुरुग्राम पर पड़ी है, जहाँ अब खरीदारों को भारी-भरकम राशि चुकानी होगी।
पुराने आवेदकों पर भी पड़ेगा असर: अंतर राशि का भुगतान अनिवार्य
सरकार ने साफ कर दिया है कि ये नई दरें केवल भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए ही नहीं हैं। जिन परियोजनाओं के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा चुके हैं लेकिन अभी तक 'ड्रॉ' (Draw) नहीं हुआ है, वहां भी सफल आवेदकों को पुराने और नए रेट के बीच की 'अंतर राशि' का भुगतान करना होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि उन मामलों में ड्रा की प्रक्रिया पुराने आवेदनों के आधार पर ही पूरी की जाएगी, लेकिन अलॉटमेंट लेटर नई दरों के हिसाब से ही जारी होगा।
बाल्कनी के लिए एक समान 'सरचार्ज'
संशोधित नीति में बाल्कनी की दरों को लेकर पूरे प्रदेश में एकरूपता लाई गई है। अब चाहे फ्लैट गुरुग्राम में हो या किसी छोटे शहर में, बाल्कनी के लिए खरीदार को 1,300 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान करना होगा। इसकी अधिकतम सीमा 1.30 लाख रुपये तय की गई है। जानकारों का मानना है कि निर्माण सामग्री (सरिया, सीमेंट) के बढ़ते दामों के बीच डेवलपर्स के दबाव में सरकार ने यह फैसला लिया है, जिससे अफोर्डेबल हाउसिंग का 'अफोर्डेबल' टैग अब खतरे में नजर आ रहा है।