पराली और पानी की किल्लत का पक्का इलाज, हरियाणा के किसानों को मिलेंगे 1122 करोड़ रुपये
Mar 20, 2026 12:57 PM
हरियाणा। हरियाणा की कृषि नीति में एक बड़ा वैचारिक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार अब खेती को केवल 'श्रम' नहीं बल्कि 'बिजनेस मॉडल' के रूप में विकसित करने जा रही है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति (SLSC) की बैठक में इस दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली 1122 करोड़ रुपये की योजना पर मुहर लग गई है। इस भारी-भरकम बजट का सीधा उद्देश्य खेती की लागत घटाना और आधुनिक तकनीक के जरिए किसानों की जेब में ज्यादा मुनाफा पहुंचाना है।
मशीनीकरण पर 200 करोड़: अब पसीने की जगह चलेगी मशीन
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आधुनिक युग में परंपरागत खेती से गुजारा संभव नहीं है। इसीलिए, कृषि मशीनीकरण के लिए 200 करोड़ रुपये का विशेष कोष बनाया गया है। इस बजट से न केवल बड़े ट्रैक्टर और हार्वेस्टर, बल्कि छोटे व सीमांत किसानों के लिए उपयोगी आधुनिक उपकरण भी सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाएंगे। मंशा साफ है—तकनीक का लाभ केवल रसूखदार किसानों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव के आखिरी छोर पर बैठे किसान की उत्पादकता भी बढ़े।
पराली का समाधान और पानी की हर बूंद का हिसाब
सर्दियों के मौसम में अक्सर विवादों के केंद्र में रहने वाले पराली प्रबंधन के लिए सरकार ने 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें मशीनों की खरीद और जागरूकता अभियानों पर जोर दिया जाएगा ताकि किसान पराली जलाने के बजाय उसे खाद या कमाई के स्रोत में बदल सकें। वहीं, गिरते भूजल स्तर की चुनौती से निपटने के लिए 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना के तहत 160 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके जरिए ड्रिप और स्प्रिंकलर इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कम पानी में ज्यादा पैदावार ली जा सके।
बागवानी और मधुमक्खी पालन: कमाई के नए रास्ते
धान और गेहूं के पारंपरिक फसल चक्र से किसानों को बाहर निकालने के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन को 110 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके तहत फलों और सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज और बेहतर मार्केटिंग नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, मधुमक्खी पालन के लिए 6 करोड़ रुपये की विशेष मंजूरी दी गई है, जो किसानों के लिए 'साइड बिजनेस' के तौर पर आय का एक मजबूत जरिया बनेगा। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी 15 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं, जिससे रसायन मुक्त उपज की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा किया जा सके।
तिलहन और दलहन पर विशेष फोकस
देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत तिलहन (Oilseeds) और दलहन (Pulses) की खेती पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन फसलों के लिए बीज से लेकर बाजार तक की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। जानकारों का मानना है कि यदि यह 1122 करोड़ रुपये की योजना जमीन पर सही तरीके से उतरती है, तो हरियाणा आने वाले वर्षों में 'स्मार्ट फार्मिंग' के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।