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IDFC बैंक घोटाले में एक और अधिकारी की छुट्टी, विजीलैंस जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

May 02, 2026 10:01 AM

हरियाणा। हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए सरकार ने करोड़ों रुपये के बैंक घोटाले में संलिप्त एक और बड़े अधिकारी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के नियंत्रक, वित्त एवं लेखाधिकारी राजेश सांगवान को शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया गया। राजेश सांगवान पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल सरकारी धन की हेराफेरी की, बल्कि निजी व्यक्तियों और बैंक अफसरों के साथ मिलकर गबन की पूरी साजिश रची। इस मामले में सरकार पहले ही दो अन्य लेखा अधिकारियों को बर्खास्त कर चुकी है, जिससे विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है।

फाइलों में खेल और नियमों की अनदेखी

विजीलैंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। सांगवान ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खोलने की फाइल तब आगे बढ़ाई जब विभाग के पास पहले से ही एम्पैनल्ड बैंकों की सूची मौजूद थी। हैरानी की बात यह है कि खाता खोलने से पहले न तो अन्य बैंकों से कोटेशन लिए गए और न ही ब्याज दरों की तुलना की गई। सांगवान ने जानबूझकर 'ड्यू डिलिजेंस' (उचित सावधानी) की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया। यहां तक कि जुलाई 2025 में जब वित्त विभाग ने सभी बैंक खातों का विवरण मांगा, तो सांगवान ने उसे दबा दिया और कोई जवाब नहीं दिया।

10 करोड़ का गबन और शेल कंपनियों का जाल

इस पूरे घोटाले की जड़ 10 करोड़ रुपये का वो संदिग्ध ट्रांजेक्शन है, जो जनवरी 2026 में किया गया था। जांच में पाया गया कि सांगवान बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे। उनकी मिलीभगत से 9.75 करोड़ रुपये RTGS के जरिए और 25 लाख रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए। यह भारी-भरकम रकम 'एसआर जार प्लानिंग प्राइवेट लिमिटेड' और 'मन्नत कंस्ट्रक्शन' जैसी संदिग्ध कंपनियों के खातों में भेजी गई। विजीलैंस की पूछताछ में मुख्य आरोपियों ने स्वीकार किया है कि इस अवैध लेन-देन के बदले सांगवान को मोटी रकम दी गई थी।

चेकबुक के साथ धोखाधड़ी और बाहरी दखल

घोटाले की परतों को खोलते हुए एसीबी (ACB) ने पाया कि राजेश सांगवान ने न केवल नियमों को तोड़ा, बल्कि सरकारी मर्यादा को भी ताक पर रख दिया। उन्होंने बैंक की चेकबुक एक बाहरी व्यक्ति (विजय ऋषि) के हवाले कर दी थी। इतना ही नहीं, जांच में एक कैंसिल किए गए चेक नंबर-6 का भी जिक्र है, जिसे जानबूझकर ट्रैक नहीं किया गया और बाद में उसी चेक का इस्तेमाल करोड़ों की धोखाधड़ी के लिए हुआ। विजीलैंस के अधिकारियों का दावा है कि सांगवान सीधे तौर पर मुख्य साजिशकर्ताओं के संपर्क में थे और बैंक कर्मचारियों की एक कॉल पर ट्रांजेक्शन को मंजूरी दे दी जाती थी।

आगे और भी कस सकता है कानून का शिकंजा

राजेश सांगवान की गिरफ्तारी 14 मार्च को हुई थी और तब से चल रही लंबी पूछताछ और दस्तावेजी जांच के बाद सरकार ने बर्खास्तगी का यह कड़ा फैसला लिया है। सरकारी आदेशों के अनुसार, यह एक सुनियोजित वित्तीय अपराध है जिसने सार्वजनिक खजाने को भारी क्षति पहुंचाई है। सूत्रों की मानें तो जांच अभी खत्म नहीं हुई है। बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य बिचौलियों की भूमिका की अभी भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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