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चिराग योजना: आवेदन की खिड़की तो खुली, पर पोर्टल से 'सीटें' ही नदारद; विभाग की लापरवाही से अभिभावक बेहाल

Mar 17, 2026 1:00 PM

हरियाणा। हरियाणा के गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने के सपने दिखाने वाली 'चिराग योजना' इस बार खुद अंधेरे में नजर आ रही है। शिक्षा विभाग ने नए सत्र (2026-27) के लिए आवेदन का बिगुल तो बजा दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारी करना शायद भूल गया। आलम यह है कि 13 मार्च से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, मगर अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि किस स्कूल में कितनी सीटें खाली हैं। विभाग ने निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों से ब्योरा तो काफी पहले मंगवा लिया था, लेकिन उस डेटा को प्रोसेस कर स्कूलों को सीटें आवंटित करने की फाइल अब भी दफ्तरों में धूल फांक रही है। नतीजा यह है कि अभिभावक अपने बच्चों का फॉर्म लेकर एक स्कूल से दूसरे स्कूल के चक्कर काट रहे हैं, पर उन्हें हर जगह से खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है।

प्राइवेट स्कूल संघ का फूटा गुस्सा: 'बिना सीटों के आवेदन कैसे संभव?'

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने इस पूरी प्रक्रिया को मजाक करार दिया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि निदेशालय ने 29 जनवरी से 15 फरवरी के बीच निजी स्कूलों से उनकी सहमति और खाली सीटों का पूरा विवरण मांगा था। स्कूलों ने पूरी तत्परता दिखाते हुए निर्धारित समय में विभाग की वेबसाइट पर सारा डेटा अपलोड भी कर दिया। नियम के मुताबिक, आवेदन शुरू होने से पहले निदेशालय को स्कूलों को सीटें अलॉट करनी थीं, जो अब तक नहीं हुआ। कुंडू के मुताबिक, "जब किसी स्कूल को यह पता ही नहीं कि उसके पास चिराग योजना की कितनी सीटें हैं, तो वह अभिभावकों के फॉर्म कैसे स्वीकार करेगा?"

असमंजस में अभिभावक: स्कूल कह रहे 'हमें नहीं पता', विभाग मौन

इस प्रशासनिक खींचतान के बीच सबसे ज्यादा पिसाई उन अभिभावकों की हो रही है, जो अपने बच्चों का दाखिला बड़े निजी स्कूलों में कराने की उम्मीद पाले हुए हैं। 13 मार्च से पोर्टल खुलने के बाद से ही लोग स्कूलों में पहुंच रहे हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन का साफ कहना है कि उनके पास विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक 'सीट अलॉटमेंट' लेटर नहीं आया है। अभिभावकों का कहना है कि 30 मार्च आवेदन की आखिरी तारीख है और पहले ही कई दिन बर्बाद हो चुके हैं। यदि जल्द ही सीटें अलॉट नहीं हुईं, तो सर्वर डाउन होने या समय खत्म होने के डर से हजारों बच्चे इस बार योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं।

जल्द समाधान की मांग: निदेशालय की चुप्पी पर सवाल

शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यह विभाग की गंभीर रणनीतिक चूक है। जब तक स्कूलों को सीटों का आवंटन नहीं होता, तब तक आवेदन प्रक्रिया का कोई कानूनी या व्यावहारिक आधार नहीं रह जाता। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने अब सीधे शिक्षा निदेशक से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि जब तक तकनीकी खामियां दूर नहीं होतीं और स्कूलों को सीटें अलॉट नहीं की जातीं, तब तक आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए और तत्काल प्रभाव से अलॉटमेंट लिस्ट जारी की जाए। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग अपनी इस 'भूल' को कितनी जल्दी सुधारता है।

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