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हरियाणा में ड्राइवरों की बल्ले-बल्ले: मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम में किया सामाजिक सुरक्षा का वादा

Apr 27, 2026 11:55 AM

हरियाणा। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में आयोजित 'राज्यस्तरीय श्रमिक जागरूकता एवं सम्मान समारोह' के मंच से प्रदेश के लाखों ऑटो चालकों और ड्राइवरों को बड़ी सौगात दी है। भारतीय मजदूर संघ की लंबे समय से चली आ रही मांग पर मुहर लगाते हुए सीएम ने 'राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड' के गठन का ऐलान किया। इस ऐतिहासिक कदम के जरिए अब ऑटो चलाने वाले और अन्य कमर्शियल ड्राइवर भी उन सरकारी सुविधाओं और बीमा लाभों के दायरे में आएंगे, जो अब तक केवल संगठित क्षेत्र के मजदूरों को मिलते थे। मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाले इन साथियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

15 जून तक हाथ में होगा नियुक्ति पत्र, सेवा सुरक्षा पर बड़ी अपडेट

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन कर्मचारियों को भी आश्वस्त किया जो सेवा सुरक्षा नियमों के लागू होने का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल रही है और सरकार ने 15 जून तक की समयसीमा तय की है। इस तारीख तक सभी पात्र कर्मचारियों के हाथों में उनके नियुक्ति पत्र होंगे। सीएम ने कहा कि सरकार केवल घोषणाओं में विश्वास नहीं रखती, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। इस ऐलान के बाद उन हजारों कच्चे कर्मचारियों में उम्मीद जगी है जो लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर संशय में थे।

वेतन में 35% की रिकॉर्ड वृद्धि: हरियाणा बना नंबर-1 राज्य

मजदूरों के हक की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि हरियाणा 'कोड ऑन वेजिज' के प्रावधानों को लागू कर न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन गया है। अब प्रदेश में न्यूनतम वेतन बढ़कर 19,425 रुपये हो चुका है, जो श्रमिकों की क्रय शक्ति और उनके जीवन स्तर को सुधारने में मददगार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में श्रमिक वर्ग की भूमिका निर्णायक है और उनकी मेहनत ही हरियाणा को आर्थिक रूप से समृद्ध बना रही है।

श्रमिकों का कल्याण सरकार का नैतिक दायित्व

समारोह के दौरान सीएम सैनी ने भावुक होते हुए कहा कि एक श्रमिक का पसीना सूखने से पहले उसे उसका हक मिलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सिर पर पक्की छत मुहैया कराना सरकार का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को भी निर्देश दिए कि श्रमिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री के इन ऐलानों को आगामी चुनावों से पहले श्रमिक वर्ग और मध्यम वर्ग को साधने की एक बड़ी कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।

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