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हरियाणा के पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया पर भ्रष्टाचार का केस: 20 लाख की सरकारी ग्रांट के गबन का आरोप

Apr 29, 2026 12:38 PM

हरियाणा। हरियाणा की राजनीति में रसूख रखने वाले पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखबीर कटारिया एक बार फिर कानूनी चक्रव्यूह में घिर गए हैं। गुरुग्राम की एक अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मामला करीब 20 लाख रुपये की उस सरकारी ग्रांट से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर जरूरतमंदों के बजाय पूर्व मंत्री की निजी सुख-सुविधाओं और उनके करीबियों पर लुटा दिया गया।

दस्तावेजों ने खोली पोल: बिजली मीटर से मिला सुराग

सेक्टर-12 निवासी ओम प्रकाश कटारिया ने एक साल पहले अदालत में याचिका दायर कर चौंकाने वाले खुलासे किए थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, साल 2012 से 2015 के बीच अनंत सिंह, शर्मिला देवी और बसंती देवी जैसे व्यक्तियों के नाम पर मकान बनाने, दवाइयों और बच्चों की फीस के नाम पर लाखों का सरकारी अनुदान लिया गया। मजे की बात यह है कि जिस मकान की मरम्मत और निर्माण के लिए यह पैसा खर्च दिखाया गया, उसका बिजली मीटर पिछले 20 वर्षों से सुखबीर कटारिया के नाम पर दर्ज है।

पुलिस की 'क्लीन चिट' पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने दो बार अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की और पूर्व मंत्री को 'क्लीन चिट' थमा दी। हालांकि, अदालत ने पुलिसिया जांच पर असंतोष जताते हुए कहा कि अनुदानों की पुष्टि तो कागजों में हो गई, लेकिन उनकी वैधता और लाभार्थी की असल पहचान की सही जांच नहीं की गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप सही हैं, तो यह सरकारी धन की खुली लूट है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना अनिवार्य है।

ग्रांट का गणित: दवा से लेकर बच्चों की फीस तक का खेल

याचिका के अनुसार, साल 2013-14 में आनंद नाम के व्यक्ति को घर बनाने के लिए 3 लाख, शर्मिला को पति की दवा और कपड़ों के लिए 1 लाख और बसंती देवी को 1.65 लाख रुपये बच्चों की फीस के नाम पर दिए गए। इतना ही नहीं, 'प्रगति विकास समिति' नामक संस्था के नाम पर 10 लाख रुपये की भारी-भरकम ग्रांट जारी करवाई गई, जिसका रजिस्ट्रेशन उसी पते पर था जो पूर्व मंत्री का निजी निवास है।

कटारिया का पक्ष: 'न्यायपालिका पर भरोसा'

दूसरी ओर, पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि इस मामले में दो बार एसआईटी (SIT) जांच कर चुकी है और उन्हें दोषमुक्त पाया गया है। कटारिया ने कहा कि सरकारी अनुदान पूरी तरह से डीसी और एसडीएम के सत्यापन (Verification) के बाद ही जारी किए जाते हैं। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कहते हुए न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास जताया है। फिलहाल, न्यू कॉलोनी थाना पुलिस ने भ्रष्टाचार-रोधी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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