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भाजपा का बड़ा फैसला: असम में विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे CM नायब सिंह सैनी, मिली सह-प्रभारी की कमान

May 05, 2026 3:00 PM

हरियाणा। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का राजनीतिक कद अब राष्ट्रीय स्तर पर और भी मजबूती से उभर रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व ने एक बड़ा संगठनात्मक दांव खेलते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को असम में विधायक दल का नेता चुनने की प्रक्रिया के लिए सह-प्रभारी नियुक्त किया है। यह फैसला न केवल असम की राजनीति, बल्कि नायब सैनी की प्रशासनिक कुशलता पर हाईकमान के भरोसे को भी दर्शाता है।

जेपी नड्डा होंगे केंद्रीय पर्यवेक्षक, सैनी निभाएंगे समन्वय की भूमिका

भाजपा संसदीय बोर्ड की ओर से जारी आदेश के अनुसार, असम में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और पार्टी के कद्दावर नेता जगत प्रकाश नड्डा को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उनके साथ सह-प्रभारी के तौर पर मोर्चा संभालेंगे। यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री को दूसरे राज्य में इतनी बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई हो, लेकिन सैनी के लिए यह उनके बढ़ते राजनीतिक रसूख का प्रमाण है।

क्यों चुना गया नायब सैनी को?

राजनीतिक पंडितों की मानें तो नायब सिंह सैनी को यह जिम्मेदारी देने के पीछे कई ठोस कारण हैं:

संगठनात्मक पकड़: हरियाणा में जिस तरह उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में संगठन को एकजुट कर सत्ता में वापसी कराई, उससे आलाकमान बेहद प्रभावित है।

सुलझा हुआ स्वभाव: सैनी को विवादों से दूर रहकर सर्वसम्मति बनाने में माहिर माना जाता है। असम जैसे राज्य में, जहाँ क्षेत्रीय समीकरणों का खासा महत्व है, सैनी का समन्वय कौशल पार्टी के काम आएगा।

अनुभव का संगम: वे असम में वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल बिठाकर विधायक दल के नेता के चयन को पारदर्शी और निर्विवाद बनाने में मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाएंगे।

असम में नई सरकार की सुगबुगाहट

असम में चुनावी गहमागहमी के बाद अब नेतृत्व के चयन को लेकर भाजपा कोई ढील नहीं छोड़ना चाहती। सूत्रों का कहना है कि नायब सैनी जल्द ही गुवाहाटी का रुख कर सकते हैं, जहाँ वे जेपी नड्डा के साथ मिलकर विधायकों की नब्ज टटोलेंगे और हाईकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। इस नियुक्ति के बाद हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज है कि केंद्रीय नेतृत्व अब सैनी को राष्ट्रीय स्तर पर 'ट्रबल शूटर' (संकटमोचक) के रूप में तैयार कर रहा है।

भाजपा का यह फैसला यह भी साफ करता है कि पार्टी आगामी रणनीतियों के लिए अपने क्षेत्रीय क्षत्रपों को अंतर-राज्यीय जिम्मेदारियां देकर उनकी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। अब सबकी निगाहें गुवाहाटी पर टिकी हैं, जहाँ नड्डा और सैनी की जोड़ी असम के भविष्य का 'कप्तान' तय करेगी।

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