Search

Haryana Smart Agriculture: हरियाणा में प्राकृतिक खेती करने वालों की मौज, नुकसान हुआ तो खुद मुआवजा देगी सैनी सरकार

Jun 08, 2026 4:57 PM

कुरुक्षेत्र। रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से दम तोड़ती खेतों की सेहत और इंसानी शरीर में घर करती बीमारियों के बीच, हरियाणा सरकार ने कृषि क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की नींव रख दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में आयोजित 'प्राकृतिक खेती एवं क्लस्टर गठन' कार्यक्रम में किसानों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच घोषित किया है। सीएम ने कहा कि प्रदेश में 2000 एकड़ के बड़े क्लस्टर बनाकर आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ 'स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना' लागू की जाएगी। इस योजना की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि यदि इस नई पद्धति को अपनाने के शुरुआती दौर में किसानों को किसी भी तरह का आर्थिक नुकसान होता है, तो उसकी शत-प्रतिशत भरपाई सूबे की सरकार करेगी।

"जल, जंगल और जमीन जीवन का आधार"— परंपरा की ओर लौटने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में खेती की पारंपरिक विरासत को याद करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की रगों में बसी पुरानी परंपरा का अटूट हिस्सा है। सदियों तक इसी वैज्ञानिक पद्धति ने हमारी धरती मां को उपजाऊ बनाए रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज के दौर में जल, जंगल और जमीन का संरक्षण करना सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अस्तित्व की जरूरत बन चुका है।

इस दौरान मंच पर मौजूद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र की 180 एकड़ भूमि पर आज पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से फसलें लहलहा रही हैं, जहां यूरिया या किसी अन्य रासायनिक कीटनाशक का नामोनिशान तक नहीं है। वहीं प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने आगाह किया कि रासायनिक खेती ने जमीन और अनाज दोनों को जहरीला बना दिया है, जिसे बदले बिना 'विकसित भारत' का सपना अधूरा रहेगा।

नीति में बड़ा बदलाव: 10 साल का संकल्प लेने वालों को ही मिलेगी सरकारी जमीन

मुख्यमंत्री ने सरकारी स्तर पर उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए बताया कि साल 2022 में शुरू की गई प्राकृतिक खेती योजना के विशेष पोर्टल पर अब तक सूबे के लगभग 2 लाख किसान खुद को रजिस्टर्ड करा चुके हैं। किसानों को इस विधा में पारंगत करने के लिए कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल (घरौंडा) में चार अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर चालू हैं, जहां 12 हजार से अधिक लोग प्रशिक्षण ले चुके हैं।

पॉलिसी लेवल पर एक और बड़ा फैसला लेते हुए सीएम सैनी ने घोषणा की कि कृषि विभाग के पास उपलब्ध करीब 800 एकड़ सरकारी भूमि अब केवल उन्हीं प्रगतिशील किसानों को पट्टे (लीज) पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 साल तक अनिवार्य रूप से प्राकृतिक या जैविक खेती करने का लिखित संकल्प लेंगे। इसके लिए एक पारदर्शी नीति बहुत जल्द सामने लाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, शिवालिक की पहाड़ियों से घिरे पंचकूला के मोरनी ब्लॉक को इस पूरी मुहिम के पायलट प्रोजेक्ट यानी 'मॉडल क्षेत्र' के रूप में विकसित किया जाएगा, जो आने वाले समय में पूरे उत्तर भारत के लिए एक नजीर बनेगा।

You may also like:

Please Login to comment in the post!