हरियाणा के किसानों की मौज: देशी कपास की खेती पर ₹3000 सब्सिडी, सरकार ने जारी किए आदेश
Mar 21, 2026 4:05 PM
हरियाणा। धान और गेहूं के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलकर खेती को मुनाफे का सौदा बनाने की कोशिश में जुटी हरियाणा सरकार ने अब 'सफेद सोने' यानी कपास की खेती पर बड़ा दांव खेला है। प्रदेश में देशी कपास के रकबे को बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना को हरी झंडी दे दी है। कृषि विभाग के ताजा फैसले के मुताबिक, जो किसान अपने खेतों में देशी कपास की बिजाई करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से ₹3,000 प्रति एकड़ की सीधी सब्सिडी दी जाएगी। यह कदम न केवल गिरते भूजल स्तर को बचाने में मददगार होगा, बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा करेगा।
खाद और कीटनाशकों के लिए भी मिलेगी 'पॉकेट मनी'
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुखदेव कंबोज ने योजना की बारीकियां साझा करते हुए बताया कि सरकार केवल बिजाई तक ही सीमित नहीं है। किसानों पर लागत का बोझ कम करने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micro-nutrients) और कीटनाशकों की खरीद पर भी ₹2,000 प्रति एकड़ की सहायता राशि दी जा रही है। हालांकि, यह लाभ अधिकतम 2 एकड़ तक की भूमि के लिए ही देय होगा। डॉ. कंबोज ने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किसानों को 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर अपना पंजीकरण समय रहते पूरा करना होगा, ताकि सब्सिडी की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा सके।
आधुनिक खेती के लिए 'डेमो प्लॉट' पर ₹6000 की सब्सिडी
सरकार का जोर केवल सब्सिडी बांटने पर नहीं, बल्कि किसानों को नई तकनीक से रूबरू कराने पर भी है। इसके लिए विभिन्न ब्लॉकों में 'प्रदर्शन प्लॉट' (Demonstration Plots) स्थापित किए जा रहे हैं। इन प्लॉट्स के जरिए किसानों को यह दिखाया जाएगा कि वैज्ञानिक तरीके से बिजाई करने पर पैदावार कैसे बढ़ाई जा सकती है। ऐसे प्रदर्शन प्लॉट्स के लिए सरकार ₹6,000 प्रति एकड़ तक की भारी-भरकम सब्सिडी दे रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयोगों से किसान बागवानी और ऑर्गेनिक खेती की ओर प्रेरित होंगे, जिससे लंबी अवधि में लागत कम और मुनाफा अधिक होगा।
परंपरागत खेती के मोह से निकल रहा हरियाणा का अन्नदाता
राज्य सरकार समय-समय पर जागरूकता शिविरों के माध्यम से किसानों को गेहूं और धान की परंपरागत खेती के बजाय वैकल्पिक फसलों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रही है। कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा सुझाई गई नवीनतम विधियों को अपनाकर किसान अब कम पानी में बेहतर फसल ले सकेंगे। इस योजना के पीछे सरकार का एक बड़ा उद्देश्य कपास बेल्ट (सिरसा, हिसार, फतेहाबाद) में देशी किस्मों को बढ़ावा देना है, जो कीटों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वित्तीय मदद के बाद आगामी सीजन में देशी कपास के रकबे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।