हरियाणा निकाय चुनाव: दूसरे राज्यों की बहुओं को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, चुनाव आयोग का सख्त फैसला
Apr 24, 2026 11:01 AM
हरियाणा। हरियाणा में चुनावी बिगुल बजते ही आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी उलझनों पर राज्य चुनाव आयोग ने विराम लगा दिया है। निकाय और पंचायत चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के बीच आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि आरक्षित सीटों पर केवल वही उम्मीदवार चुनाव लड़ पाएंगे, जो मूल रूप से हरियाणा के निवासी हैं और जिनके पास यहीं का वैध जाति प्रमाण पत्र है। यह स्पष्टीकरण उन मामलों में बेहद अहम है जहां दूसरे राज्यों की महिलाएं शादी के बाद हरियाणा में बस गई हैं और आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं।
शादी के आधार पर नहीं मिलेगा कोटा
अक्सर यह देखा जाता था कि पंजाब, राजस्थान या उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से आने वाली महिलाएं, जो अपने मायके में आरक्षित श्रेणी से ताल्लुक रखती हैं, हरियाणा में शादी के बाद इसी कोटे का लाभ मांगती थीं। चुनाव आयोग ने अब साफ कर दिया है कि विवाह किसी भी व्यक्ति की मूल जाति या उसके आरक्षण के अधिकार को स्थानांतरित नहीं करता। विधि एवं विधायी विभाग की राय का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि यदि किसी महिला की जाति हरियाणा की आरक्षित सूची में शामिल भी है, तब भी उसे दूसरे राज्य से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर यहाँ लाभ नहीं मिलेगा।
अधिकारियों को 'स्कैनिंग' के सख्त निर्देश
स्टेट इलेक्शन कमिश्नर देवेंद्र कल्याण ने इस संबंध में सभी जिला उपायुक्तों और रिटर्निंग अधिकारियों को गाइडलाइंस दोबारा भेजी हैं। आयोग को जिलों से लगातार यह फीडबैक मिल रहा था कि आरक्षण की पात्रता को लेकर फील्ड अफसरों में भ्रम की स्थिति है। कमिश्नर ने सख्त लहजे में कहा है कि नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) के दौरान दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल की जाए। यदि कोई उम्मीदवार बाहरी राज्य का सर्टिफिकेट पेश करता है, तो उसका नामांकन आरक्षित श्रेणी के तहत रद्द कर दिया जाए।
पारदर्शी चुनाव के लिए कड़ा रुख
आयोग का यह फैसला चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और नियमों के दायरे में रखने की एक बड़ी कवायद माना जा रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत है कि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस फैसले के बाद अब उन बाहरी उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है जो शादी के बाद हरियाणा की सियासत में अपनी जमीन तलाश रहे थे। अब चुनावी मैदान में केवल उन्हीं चेहरों की दावेदारी मजबूत होगी जिनके पास हरियाणा का रिहायशी और जातिगत रिकॉर्ड दुरुस्त है।