हरियाणा के किसानों की मौज: मुफ्त में घूमेंगे दूसरे राज्य, सैनी सरकार सिखाएगी आधुनिक खेती
Apr 27, 2026 1:29 PM
हरियाणा। हरियाणा की खेती-किसानी को पारंपरिक ढर्रे से निकालकर आधुनिकता की पटरी पर लाने के लिए नायब सैनी सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा बजट में की गई घोषणा के अनुरूप अब प्रदेश के किसानों को गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान जैसे राज्यों के 'एक्स्पोजर टूर' पर भेजा जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इस योजना का खाका तैयार कर लिया है और 15 मई तक इसे कैबिनेट की अंतिम मुहर के लिए भेज दिया गया है। इस यात्रा का मुख्य मकसद हरियाणा के अन्नदाता को यह दिखाना है कि कैसे कम पानी और आधुनिक मार्केटिंग के जरिए दूसरे राज्यों के किसान अपनी आमदनी को दोगुना कर रहे हैं।
चरणों में होगी यात्रा: जुलाई तक निकलेगा पहला जत्था
विभाग ने जो कार्ययोजना तैयार की है, उसके अनुसार यह दौरा तीन चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में 31 जुलाई तक हर जिले से 30 किसानों को चुना जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में दिसंबर तक 40 किसानों और अंतिम चरण में अगले साल मार्च तक शेष 30 किसानों को भ्रमण कराया जाएगा। कुल मिलाकर हर जिले के 100 किसान इस विशेष ट्रेनिंग कम एक्सपोजर प्रोग्राम का हिस्सा बनेंगे। सरकार की योजना है कि किसान वहां जाकर न केवल नई फसलें देखें, बल्कि पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और सीधे बाजार से जुड़ने की बारीकियों को भी समझें।
सरकार उठाएगी सारा खर्च, इन किसानों को मिलेगा मौका
इस योजना की सबसे बड़ी राहत यह है कि किसानों को अपनी जेब से एक पैसा भी खर्च नहीं करना होगा। यात्रा, रहने-सहने और भोजन का पूरा इंतजाम विभाग द्वारा किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने कुछ मानक तय किए हैं। इसमें उन किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी जो पहले से कुछ नवाचार कर रहे हैं या जिन्हें राज्य व जिला स्तर पर 'प्रगतिशील किसान' का पुरस्कार मिल चुका है। साथ ही, युवा किसानों को भी इसमें विशेष अवसर दिया जाएगा ताकि वे लौटकर अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए 'रोल मॉडल' बन सकें।
उन्नत विपणन और तकनीक पर रहेगा फोकस
अक्सर देखा जाता है कि बेहतर पैदावार के बावजूद किसान सही विपणन (Marketing) के अभाव में पिछड़ जाते हैं। इस दौरे के दौरान हरियाणा के किसानों को महाराष्ट्र के अंगूर और प्याज बेल्ट, गुजरात के डेयरी व सहकारी मॉडल और राजस्थान की सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का अध्ययन कराया जाएगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसान अपनी आंखों से तकनीक का प्रभाव देखेंगे, तो वे उसे अपने खेतों में लागू करने के लिए ज्यादा प्रेरित होंगे। यह पहल प्रदेश में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।