नौकरी छोड़ पलवल के अजय ने फूलों की खेती से कमाया प्रति एकड़ 4 लाख का मुनाफा
Apr 27, 2026 5:55 PM
पलवल। कहते हैं कि अगर जुनून और सही तजुर्बा साथ हो, तो बंजर जमीन से भी खुशहाली उगाई जा सकती है। हरियाणा के पलवल जिले के युवा किसान अजय ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। हरियाणा सरकार के बागवानी विभाग में सात साल तक पानीपत में अपनी सेवाएं देने वाले अजय ने जब अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिया, तो शायद कई लोगों ने इसे एक जोखिम भरा कदम माना होगा। लेकिन अजय के पास बागवानी का वह गहरा अनुभव था, जिसे उन्होंने अपने खेतों में उतारने का संकल्प लिया था। आज उनके खेतों में लहलहाते गेंदे के फूल उनकी मेहनत और सटीक रणनीति की गवाही दे रहे हैं।
24 घंटे नहीं, 4 दिन तक ताजा रहते हैं फूल: तकनीक ने बढ़ाया मुनाफा
अजय की सफलता का सबसे बड़ा राज उनकी फसल का चुनाव और उसकी गुणवत्ता है। उन्होंने गेंदे की एक ऐसी विशेष किस्म उगाई है, जिसकी शेल्फ-लाइफ सामान्य फूलों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। जहाँ आम तौर पर गेंदे का फूल 24 घंटे में कुम्हलाने लगता है, वहीं अजय के खेतों का फूल 3 से 4 दिनों तक अपनी ताजगी और चमक बरकरार रखता है। फरवरी माह में शुरू की गई इस खेती से अब रोजाना 2 से 3 क्विंटल फूलों का उत्पादन हो रहा है। बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच उन्हें औसतन 40 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता है, जो मांग बढ़ने पर 250 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच जाता है।
गणित जो बदल देगा किसानों की सोच: 1.25 लाख बनाम 6.5 लाख
अजय ने अपनी सफलता को आंकड़ों के जरिए बहुत खूबसूरती से समझाया है। उनके मुताबिक, गेंदे का एक फसल चक्र करीब 5 महीने का होता है, जिसमें बुवाई के महज 45 दिन बाद फूल आने शुरू हो जाते हैं। एक सीजन में एक एकड़ से करीब 3 से 3.25 लाख रुपये की बिक्री होती है। साल में दो बार फसल लेकर वे करीब 6.5 लाख रुपये का राजस्व जुटाते हैं। बीज, खाद और मजदूरी जैसे तमाम खर्चे निकाल दें, तब भी 4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा उनके हाथ में आता है। इसके विपरीत, अगर वे गेहूं या धान की पारंपरिक खेती करते, तो एक एकड़ में कुल उत्पादन ही सवा लाख के करीब सिमट जाता, जिसमें बचत नाममात्र की होती।
"बाजार की नब्ज पहचानें किसान"
अजय का मानना है कि अब वक्त आ गया है जब किसानों को अपनी पुरानी लीक छोड़नी होगी। वे कहते हैं कि अगर किसान केवल मेहनत न करें, बल्कि बाजार की मांग और फसल चक्र का वैज्ञानिक तरीके से तालमेल बैठाएं, तो खेती कभी घाटे का सौदा नहीं होगी। फूलों और सब्जियों की खेती में कम समय और कम लागत में अधिक मुनाफे की अपार संभावनाएं हैं। आज अजय न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि वे उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा हैं जो खेती को पिछड़ा हुआ मानकर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।