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Haryana Female Constable Recruitment: HSSC के शार्टलिस्टिंग फॉर्मूले पर हाईकोर्ट की चोट, महिला कांस्टेबल भर्ती मामले में सरकार को नोटिस

Jun 14, 2026 3:25 PM

हरियाणा। हरियाणा में सरकारी नौकरियों की भर्तियों को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला महिला कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) की भर्ती से जुड़ा है, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम मोड़ पर अभ्यर्थियों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है।

चयन प्रक्रिया की विसंगतियों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली महिला अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए आगामी सीईटी-2 परीक्षा में प्रोविजनल (अस्थायी) तौर पर शामिल होने की हरी झंडी दे दी है। इस आदेश के बाद उन सैंकड़ों योग्य उम्मीदवारों की उम्मीदें एक बार फिर जिंदा हो गई हैं, जो ज्यादा नंबर लाकर भी आयोग की 'शॉर्टलिस्टिंग' की भेंट चढ़ गई थीं।

आयोग का तरीका मनमाना और स्थापित नियमों के खिलाफ: वकील की दलील

दरअसल, आरजू और अन्य महिला अभ्यर्थियों ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा जारी की गई शॉर्टलिस्टिंग सूची के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील मजलीश खान ने अदालत के सामने आयोग की कार्यप्रणाली की कमियां उजागर कीं।

उन्होंने पुरजोर दलील दी कि फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट (PMT) के लिए उम्मीदवारों का चयन करने का जो पैमाना आयोग ने अपनाया है, वह न केवल त्रुटिपूर्ण है बल्कि कानून के स्थापित सिद्धांतों के भी विपरीत है। याचिका में मांग की गई कि आयोग की इस दोषपूर्ण सूची को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और नियमों के मुताबिक एक नई पारदर्शी मेरिट सूची तैयार की जाए।

जस्टिस संदीप मौदगिल ने माना विचारणीय मामला, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस संदीप मौदगिल की एकल पीठ ने उपलब्ध दस्तावेजों और सुप्रीम कोर्ट के हालिया नजीरों का अध्ययन किया। हालांकि, सुनवाई के दौरान सरकारी वकील और आयोग की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अन्य मामले का हवाला देकर बचने की कोशिश की गई, लेकिन अदालत ने उसे नाकाफी माना।

हाईकोर्ट ने इस बात को विशेष तौर पर रेखांकित किया कि याचिका दायर करने वाली दोनों महिला अभ्यर्थियों के अंक सामान्य वर्ग (General Category) के लिए तय की गई आधिकारिक कटऑफ से कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में उन्हें परीक्षा से दूर रखना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।

परीक्षा में बैठेंगी अभ्यर्थी, लेकिन अंतिम फैसले के अधीन रहेगा परिणाम

अदालत ने इन परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में बैठने का अधिकार तो दे दिया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि यह राहत अस्थायी है।

इन अभ्यर्थियों का परिणाम इस मुख्य केस के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस ऑफ मोशन जारी कर दिया है। अब आयोग को अदालत में लिखित जवाब दाखिल कर यह समझाना होगा कि आखिर कटऑफ पार करने वाले योग्य उम्मीदवारों को लिस्ट से बाहर क्यों रखा गया।

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