हरियाणा का पहला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट: करनाल में 600 एकड़ पर बनेगा हवाई अड्डा, जानें क्या है सरकार का प्लान
Mar 13, 2026 3:29 PM
हरियाणा। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र की सूरत बदलने की दिशा में एक मास्टरप्लान तैयार किया है। इस योजना का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु करनाल बनने जा रहा है, जहां प्रदेश का पहला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा विकसित किया जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि करनाल पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का संसदीय क्षेत्र है, ऐसे में इस प्रोजेक्ट को राजनीतिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ही इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी सभी 600 एकड़ जमीन और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल कर ली जाएं।
बजट में 87% की बढ़ोतरी: विकास की नई रफ़्तार
हरियाणा सरकार ने इस बार अपने वार्षिक बजट में नागरिक उड्डयन के लिए खजाना खोल दिया है। विभाग के बजट में करीब 87% की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है, जिससे साफ है कि सरकार सड़क मार्ग के साथ-साथ अब हवाई कनेक्टिविटी को अपनी प्राथमिकता बना चुकी है। नागरिक उड्डयन मंत्री विपुल गोयल ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि विभाग का बजट 306 करोड़ से बढ़ाकर अब 573 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है। इस राशि का बड़ा हिस्सा नए एयरपोर्ट्स के निर्माण और पुराने हवाई पट्टियों के आधुनिकीकरण पर खर्च होगा।
हिसार बनेगा एयर कार्गो का हब, पिंजौर को मिलेगा हेलीपोर्ट
हिसार स्थित महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट को लेकर भी सरकार के इरादे बेहद स्पष्ट हैं। अयोध्या, चंडीगढ़ और जयपुर के बाद अब यहां से जम्मू और अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की कागजी कार्रवाई अंतिम चरण में है। मंत्री विपुल गोयल के मुताबिक, हिसार में एयर कार्गो टर्मिनल का निर्माण इसी साल पूरा कर लिया जाएगा, जिससे दक्षिण हरियाणा के व्यापारियों को माल ढुलाई में बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, पंचकूला के पिंजौर में एक विशेष 'हेलीपोर्ट' बनाने की योजना है। यह सामान्य हेलीपैड से अलग होगा, जहां हेलीकॉप्टरों की पार्किंग, रिफ्यूलिंग और मेंटेनेंस की विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
क्या होता है 'ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट' और इसके फायदे?
आम भाषा में समझें तो 'ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट' वह प्रोजेक्ट होता है जिसे बिल्कुल शून्य से नई जमीन पर विकसित किया जाता है। करनाल में इसके निर्माण से न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर और चंडीगढ़ के बीच एक नया लॉजिस्टिक हब भी तैयार होगा। इससे जीटी रोड बेल्ट पर स्थित उद्योगों को रफ्तार मिलेगी और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। जब दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर दबाव बढ़ता है, तो करनाल जैसा विकल्प भविष्य में एक महत्वपूर्ण बैकअप के रूप में भी काम कर सकता है।