E-Tractor Subsidy: हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदने पर मिलेंगे ₹5 लाख
May 21, 2026 2:56 PM
हरियाणा। खेती-किसानी में लगातार बढ़ती लागत और डीजल के महंगे होते दामों ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। इस संकट का स्थायी समाधान तलाशते हुए हरियाणा की नायब सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार अब प्रदेश के किसानों को पारंपरिक डीजल ट्रैक्टरों के विकल्प के रूप में 'इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर' अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। इसके लिए बकायदा 5 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी देने की योजना तैयार की गई है। सरकार का यह कदम न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में प्रदूषण के स्तर को कम करेगा, बल्कि किसानों की मासिक आमदनी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
रोटावेटर के साथ लाइव डेमो, परफॉर्मेंस देख हैरान रह गए किसान
आमतौर पर जमीनी स्तर पर किसानों के बीच यह धारणा बनी हुई थी कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां या ट्रैक्टर केवल हल्के-फुल्के कामों के लिए ठीक हैं और वे खेत की गहरी जुताई या भारी ट्रॉली खींचने में नाकाम रहेंगे। इसी संशय को दूर करने के लिए उद्योग और कृषि विभाग के सहयोग से एक लाइव परफॉर्मेंस टेस्ट का आयोजन किया गया।
इस दौरान 45 हॉर्सपावर क्षमता वाले एक आधुनिक ई-ट्रैक्टर के पीछे भारी-भरकम रोटावेटर बांधकर उसे खेत में उतारा गया। ट्रैक्टर ने बिना किसी रुकावट या तकनीकी खामी के बेहद आसानी से मिट्टी की जुताई कर दिखाई। इस सफल प्रदर्शन ने किसानों और अधिकारियों की तमाम आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
कीमत और सब्सिडी का पूरा गणित: 15 लाख का ट्रैक्टर 8 लाख में
इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने देश-विदेश की प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। सरकार ने कंपनियों के सामने सख्त रुख अपनाते हुए किसानों के हित में ट्रैक्टर की कीमतों को तर्कसंगत बनाने की बात कही।
प्रशासनिक प्रयासों के चलते कंपनियां इस 45 एचपी के ई-ट्रैक्टर की मूल कीमत (15 लाख रुपये) में सीधे 2 लाख रुपये की कटौती करने पर सहमत हो गई हैं। इस तरह ट्रैक्टर का बाजार मूल्य 13 लाख रुपये रह जाता है। इसके बाद जैसे ही सरकार की 5 लाख रुपये की सब्सिडी लागू होगी, किसान को अपनी जेब से केवल 8 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
आने वाले दिनों में बदल जाएगी खेती की सूरत
राव नरबीर सिंह के मुताबिक, यह योजना केवल सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी काम चल रहा है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर आने से किसानों का सालाना डीजल का खर्च लगभग शून्य हो जाएगा, क्योंकि इसे घर के बिजली कनेक्शन या सोलर पैनल से भी चार्ज किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के भीतर पहले चरण में हजारों किसानों तक इस तकनीक को पहुंचाना है, ताकि हरियाणा देश में 'ग्रीन फार्मिंग' का सबसे बड़ा रोल मॉडल बनकर उभर सके।