सरकारी स्कूलों के बच्चे बनाएंगे रोबोट! हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, सिरसा और करनाल में सबसे ज्यादा लैब
Mar 16, 2026 4:49 PM
हरियाणा। हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था में यह एक बड़ा 'टेक-शिफ्ट' माना जा रहा है। अब तक जिन तकनीकों और उपकरणों का जिक्र केवल निजी स्कूलों या बड़े शहरों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में होता था, वे अब सरकारी स्कूलों की लैब का हिस्सा होंगे। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन अटल टिंकरिंग लैब का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर छिपी जिज्ञासा को एक ठोस प्रोजेक्ट का रूप देना है।
रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग: भविष्य की चुनौतियों का सामना
लैब में छात्रों को केवल थ्योरी नहीं पढ़ाई जाएगी, बल्कि उन्हें उपकरण थमाए जाएंगे। छात्र खुद छोटे रोबोट बनाएंगे, 3D प्रिंटर के जरिए अपने डिजाइन को हकीकत में बदलेंगे और इलेक्ट्रॉनिक्स के जटिल सर्किट को समझेंगे। सरकार का मानना है कि यदि बच्चों को बचपन से ही कोडिंग और मेकाट्रॉनिक्स जैसे विषयों का एक्सपोजर मिले, तो वे वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं में निजी स्कूलों के बच्चों को कड़ी टक्कर दे सकेंगे।
सिरसा और करनाल बने 'हब'
इस योजना के भौगोलिक वितरण को देखें तो सिरसा जिला बाजी मारता दिख रहा है, जहाँ 26 स्कूलों का चयन किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री के गृह जिले करनाल के 20 स्कूलों में ये लैब खोली जाएंगी। विभाग का प्रयास है कि राज्य के हर जिले को इसमें कवर किया जाए ताकि क्षेत्रीय असंतुलन न रहे। इन लैब के लिए आवश्यक फंड और विशेषज्ञों की टीम भी तैनात की जा रही है, जो शिक्षकों को ट्रेनिंग देगी ताकि वे बच्चों का सही मार्गदर्शन कर सकें।
STEM शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
अटल टिंकरिंग लैब का पूरा ढांचा STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा पर आधारित है। अक्सर देखा गया है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे गणित और विज्ञान से कतराते हैं, लेकिन जब ये विषय प्रयोगात्मक (Practical) तरीके से पढ़ाए जाएंगे, तो उनमें रुचि बढ़ना स्वाभाविक है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल छात्रों को 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब क्रिएटर' बनने की प्रेरणा देगी, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से नए-नए स्टार्टअप आइडियाज भी निकलकर सामने आएंगे।
अब देखना यह है कि ये लैब कितनी जल्दी जमीन पर उतरती हैं और हरियाणा के सरकारी स्कूलों से कितने 'नन्हे वैज्ञानिक' देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करते हैं।