Haryana Guru Mitra App: हरियाणा के सरकारी शिक्षकों के लिए 'गुरु मित्र ऐप' अनिवार्य, अब AI की मदद से होगी स्कूलों में पढ़ाई
Jun 10, 2026 4:25 PM
हरियाणा। चौक-डस्टर और पारंपरिक ब्लैकबोर्ड के सहारे चलने वाले सरकारी स्कूलों को अब तकनीक की नई उड़ान मिलने जा रही है। हरियाणा शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के काम को आसान बनाने और बच्चों को आधुनिक तरीके से पढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को क्लासरूम का हिस्सा बना दिया है। निदेशालय की ओर से जारी ताजा फरमान के मुताबिक, अब हर सरकारी शिक्षक के मोबाइल में 'गुरु मित्र ऐप' का होना लाजमी होगा। विभाग का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ शिक्षकों का कागजी काम कम होगा, बल्कि पढ़ाई के स्तर में भी गुणात्मक सुधार आएगा।
क्या है 'गुरु मित्र ऐप' और कैसे बदलेगी व्यवस्था?
'गुरु मित्र ऐप' दरअसल एक एडवांस एआई प्लेटफॉर्म है, जिसे खास तौर पर शिक्षकों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। अक्सर शिक्षकों का एक बड़ा वक्त पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने, टेस्ट पेपर बनाने और प्रशासनिक कसरत में बीत जाता है। यह ऐप चंद सेकंड्स में बेहतरीन और रोचक शिक्षण सामग्री (कंटेंट) तैयार कर सकता है। इसके अलावा, कक्षा प्रबंधन (क्लास मैनेजमेंट) से लेकर कमजोर बच्चों के मूल्यांकन तक में यह ऐप शिक्षकों का 'डिजिटल मददगार' साबित होगा। विभाग ने साफ किया है कि शिक्षक इस तकनीक से कतराएं नहीं, बल्कि इसे अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने का जरिया बनाएं।
लापरवाही पर नपेगे स्कूल मुखिया
सरकार ने इस योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर उतारने के लिए सख्त पहरेदारी की व्यवस्था की है। सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस ऐप के क्रियान्वयन की रैंडम चेकिंग करें। अगर किसी शिक्षक को ऐप चलाने में तकनीकी दिक्कत आ रही है, तो उसके लिए स्पेशल गाइडेंस और टेक्निकल सपोर्ट टीम भी मुस्तैद की गई है। लेकिन बिना किसी ठोस कारण के ऐप का इस्तेमाल न करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई भी हो सकती है।
डिजिटल रेस में सबसे आगे निकलने की कवायद
देखा जाए तो हरियाणा शिक्षा विभाग पिछले कुछ समय से लगातार अपनी छवि बदलने में जुटा है। इससे पहले राज्य सरकार ने छात्रों को टैबलेट बांटकर 'ई-अधिगम' योजना की शुरुआत की थी, जिसकी देश भर में चर्चा हुई थी। इसके बाद ऑनलाइन हाजिरी और डिजिटल मूल्यांकन जैसी कड़ियां जोड़ी गईं। अब सीधे शिक्षण प्रक्रिया में एआई को शामिल करना यह दिखाता है कि सरकार सरकारी स्कूलों के बच्चों को कॉन्वेंट और प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले खड़ा करना चाहती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में देश के अन्य राज्य भी हरियाणा के इस 'गुरु मित्र' मॉडल को अपना सकते हैं।