नवीन जिंदल फाउंडेशन ने खोले तिजोरी के द्वार, जरूरतमंद छात्रों को बांटे 2.25 करोड़ रुपये
Jun 10, 2026 5:09 PM
पिहोवा(अभिषेक पूर्णिमा) : "कोई भी प्रतिभा सिर्फ इसलिए स्कूल या कॉलेज जाने से न रह जाए क्योंकि उसके माता-पिता के पास फीस भरने के पैसे नहीं हैं।" इसी मूलमंत्र को धरातल पर उतारते हुए कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल द्वारा संचालित 'यशस्वी छात्रवृत्ति योजना' आज कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र के हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा संबल बनकर उभरी है। पिहोवा के सिंचाई विभाग के विश्रामगृह में योजना के प्रचार-प्रसार और इसकी रूपरेखा को लेकर एक विशेष समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसद कार्यालय के रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया।
सवा दो करोड़ की मदद, 915 सपनों को मिली उड़ान
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं नगर पालिका चेयरमैन आशीष चक्रपाणि ने कहा कि शिक्षा के बिना किसी भी सभ्य समाज और राष्ट्र के निर्माण की कल्पना बेमानी है। नवीन जिंदल जमीनी स्तर पर युवाओं के सपनों को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और अपने निजी प्रयासों से जो नई दिशा दे रहे हैं, वह राजनीति से परे विशुद्ध सामाजिक सरोकार का उदाहरण है। सांसद कार्यालय की ओर से पहुंचे डॉ. राजकुमार ने इस दौरान योजना के अब तक के प्रगति आंकड़े साझा करते हुए बताया:
"कार्यालय प्रभारी धर्मवीर सिंह की देखरेख में चल रही इस मुहिम के तहत अब तक क्षेत्र के 915 मेधावी और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को शॉर्टलिस्ट कर ₹2.25 करोड़ की राशि सीधे वितरित की जा चुकी है। हमारा लक्ष्य कुरुक्षेत्र लोकसभा के हर उस गांव और वार्ड तक पहुंचना है, जहां पैसों की तंगी के कारण बच्चे अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।"
अनाथ बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगा जिंदल फाउंडेशन
इस बार की छात्रवृत्ति योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसके नियमों में किया गया मानवीय बदलाव है। बैठक में मौजूद पार्षद राजेश गोयल और पार्षद गगन टांक ने बताया कि वर्तमान में चूंकि हर तरफ दाखिलों (एडमिशंस) का दौर चल रहा है, ऐसे में इस योजना का दायरा बढ़ाना बेहद प्रासंगिक है।
नई गाइडलाइंस के मुताबिक:
सिंगल मदर/विधवा महिलाएं: पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक पढ़ने वाले ऐसे बच्चे जिनकी माताएं अकेले घर चला रही हैं या विधवा हैं, उनकी स्कूल फीस का 50 फीसदी हिस्सा 'नवीन जिंदल फाउंडेशन' खुद जमा करवाएगा।
अनाथ बच्चे: समाज के सबसे उपेक्षित और माता-पिता का साया खो चुके अनाथ बच्चों की शिक्षा की 100 प्रतिशत जिम्मेदारी (पूरी फीस) फाउंडेशन द्वारा वहन की जाएगी।
अभिभावक और स्कूल प्रशासन आएं आगे
चेयरमैन आशीष चक्रपाणि ने स्थानीय पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ड्यूटियां लगाते हुए कहा कि वे अपने-अपने वार्डों में ऐसे गरीब बच्चों को चिन्हित करें जो पढ़ाई में अच्छे हैं लेकिन इस वक्त कॉलेज या स्कूल की फीस देने में असमर्थ हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बिना किसी संकोच के सांसद कार्यालय या स्थानीय नपा पार्षदों से संपर्क कर इस योजना का लाभ उठाएं।
महानगरों की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर मिल रही इस फेलोशिप को पिहोवा के प्रबुद्ध नागरिकों ने भी सराहा है, क्योंकि मिड-टर्म और एडमिशन के इस सीजन में यह योजना मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को टूटने से बचाएगी।