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हरियाणा सरकार खेतों की मिट्टी की जांच के लिए खरीदी जाएंगी ढाई करोड़ की किट

Jun 09, 2026 10:14 AM

हरियाणा में पारंपरिक खेती के ढर्रे को बदलने और रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल से बेदम हो रही धरती को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए सरकार ने अब सीधे खेत की मिट्टी के भीतर से मोर्चा खोल दिया है। आने वाले दिनों में फसलों की बंपर पैदावार सिर्फ महंगे खाद और वीआईपी बीजों के भरोसे नहीं होगी, बल्कि सारा दारोमदार इस बात पर रहेगा कि खेत की मिट्टी के भीतर जैविक सांसें कितनी बची हैं। इसी जमीनी हकीकत को भांपते हुए हरियाणा सरकार ने प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर 'ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस' शुरू करने का फैसला किया है।

कृषि मंत्री की बैठक में ढाई करोड़ के प्रस्ताव पर मुहर

सोमवार को चंडीगढ़ में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा की अध्यक्षता में हाई पॉवर्ड परचेज कमेटी की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा और कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मिट्टी की सेहत सुधारने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को मंजूरी देते हुए करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से 332 आधुनिक ‘ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस’ किट खरीदने का रास्ता साफ कर दिया गया। सरकार इन किटों की मदद से सूबे की सभी 106 सरकारी प्रयोगशालाओं में मिट्टी के नमूनों की जांच की रफ्तार को दोगुना करेगी।

क्या है मिट्टी का पूरा गणित और क्यों उड़े हैं होश?

खेतों में लगातार कम होते ऑर्गेनिक कार्बन को लेकर कृषि वैज्ञानिक लंबे समय से चेतावनी दे रहे हैं। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने इस वैज्ञानिक पक्ष को सामने रखते हुए बताया:

"किसी भी सामान्य और स्वस्थ खेत से बेहतर फसल लेने के लिए उसकी मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा कम से कम 0.5 से 0.75 प्रतिशत होनी चाहिए। अगर यह स्तर एक प्रतिशत या उससे ऊपर है, तो उसे खेती के लिए सबसे आदर्श यानी सबसे बेहतरीन माना जाता है। चिंता की बात यह है कि अगर यह ग्राफ 0.5 प्रतिशत से नीचे गिरता है, तो मिट्टी की प्राकृतिक ताकत खत्म होने लगती है और फिर आप चाहे जितना मर्जी खाद डाल लें, फसल को पोषण नहीं मिलता।"

रासायनिक खादों के चक्रव्यूह से किसान को निकालने की तैयारी

इस पूरी कवायद का सीधा असर हरियाणा के आम किसान की जेब और उसकी फसलों की सेहत पर पड़ने वाला है। जब प्रयोगशालाओं से किसानों को उनके खेत के ऑर्गेनिक कार्बन की सटीक रिपोर्ट मिलेगी, तो वे जरूरत के हिसाब से ही यूरिया या डीएपी जैसे महंगे खादों का इस्तेमाल करेंगे। फिलहाल जानकारी के अभाव में किसान खेतों में जरूरत से ज्यादा रसायनों का छिड़काव कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ उनकी लागत बढ़ रही है बल्कि जमीन भी बंजर होने की कगार पर पहुंच रही है।

जल संकट के दौर में सबसे मददगार है जैविक कार्बन

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऑर्गेनिक कार्बन सिर्फ खाद की बचत नहीं करता, बल्कि गिरते भूजल स्तर के इस दौर में वरदान साबित हो सकता है। यह मिट्टी के भीतर एक स्पंज की तरह काम करता है जो पानी को सोखकर रखता है। इससे खेत की जल धारण क्षमता बढ़ती है और फसलें लंबे समय तक नमी सोखकर हरी-भरी रहती हैं। इसके अलावा यह तत्व नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्वों को बांधकर रखता है जिससे पौधों की जड़ें गहरी और मजबूत होती हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस नई तकनीक के आने से हरियाणा का किसान आत्मनिर्भर और कर्जमुक्त खेती की ओर कदम बढ़ा सकेगा।

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