पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट सख्त: सरकारी नौकरियों में विभाग आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के आदेश
Mar 20, 2026 11:23 AM
चंडीगढ़ | हरियाणा में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी कठघरे में है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के उस 'सीक्रेट फॉर्मूले' को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसके तहत चयनित उम्मीदवारों को विभागों का बंटवारा किया जाता है। न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने आयोग की खिंचाई करते हुए कहा कि विभाग आवंटन की मौजूदा व्यवस्था न केवल अपारदर्शी है, बल्कि यह पूरी तरह से चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को खत्म करती है। अदालत ने दो टूक कहा कि अगर अधिक अंक पाने वाले को उसकी पसंद का विभाग नहीं मिलता और कम अंक वाले को बेहतर पद दे दिया जाता है, तो यह योग्य उम्मीदवारों के मनोबल पर सीधा प्रहार है।
2019 के नियम अब तक 'गुप्त', कोर्ट में खुली पोल
सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आयोग जिस 'इंटरनल एल्गोरिदम' के आधार पर विभागों का बंटवारा कर रहा है, उसके मानदंड कभी सार्वजनिक ही नहीं किए गए। आयोग के सचिव ने खुद हलफनामे में माना कि 2019 में तय किए गए आवंटन के पैमानों को गुप्त रखा गया था। पांच याचिकाकर्ताओं ने इस धांधली को चुनौती दी थी, जिनमें से एक उम्मीदवार ने 65 अंक हासिल करने के बावजूद मनचाहा विभाग नहीं पाया, जबकि महज 63 अंक वाले को पसंदीदा विभाग दे दिया गया। कोर्ट ने आयोग के उस तर्क को भी 'अविश्वसनीय' बताकर खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सभी विभागों का वेतनमान समान होने से आवंटन का कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता।
"पीडब्ल्यूडी और सिंचाई जैसे विभाग अधिक वांछनीय"
न्यायमूर्ति बराड़ ने आयोग की दलीलों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि यह वास्तविकता है कि कुछ विभाग जैसे लोक निर्माण (PWD) और सिंचाई विभाग अन्य की तुलना में अधिक वांछनीय होते हैं। अदालत ने कहा कि केवल मेरिट लिस्ट बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि विभाग आवंटित करते समय भी मेरिट को ही सर्वोच्च आधार बनाना अनिवार्य है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का जिक्र करते हुए कोर्ट ने चेतावनी दी कि चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की विसंगति समानता और समान अवसर की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन है। यह प्रक्रिया संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवालिया निशान लगाती है।
3 महीने का अल्टीमेटम: अब नहीं चलेगी मनमानी
अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा और पंजाब, दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे 3 महीने के भीतर भर्ती और विभाग आवंटन के लिए एक ठोस, कानूनी और तर्कसंगत नीति तैयार करें। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय प्राथमिकताओं को मान्यता देना गलत नहीं है, लेकिन आवंटन के मानदंडों को जनता से छिपाना एक गंभीर कानूनी त्रुटि है। अब सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहां अंकों के आधार पर पारदर्शी तरीके से विभाग तय किए जाएं, ताकि किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो सके।