Haryana Bank Scam: ₹661 करोड़ के घोटाले में बड़ा मोड़, हरियाणा के इस IAS अफसर को सरकारी गवाह बनाएगी CBI
Jun 08, 2026 11:24 AM
हरियाणा। हरियाणा के बहुचर्चित ₹661 करोड़ के बैंकिंग घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगती दिख रही है। सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी इस पूरे फर्जीवाड़े की कड़ियों को जोड़ने के लिए हरियाणा कैडर के ही एक रसूखदार आईएएस अधिकारी को सरकारी गवाह बनाने की कानूनी प्रक्रिया पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगर अदालत से इसकी इजाजत मिलती है, तो संबंधित अधिकारी का बयान इस पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली (मोडस ऑपेरंडी) और पर्दे के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब करने में ब्रह्मास्त्र साबित होगा।
दिल्ली-एनसीआर तक बढ़ा जांच का दायरा, कई अफसरों के घर पड़े छापे
सीबीआई ने शनिवार को इस मामले में अपनी रणनीति बदलते हुए हरियाणा और चंडीगढ़ की सीमाओं से बाहर पैर पसारे हैं। जांच की आंच अब दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच चुकी है। जांच दल ने एक साथ चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली से सटे इलाकों में हरियाणा कैडर के तीन आईएएस और एक आईएफएस अधिकारी के सरकारी व निजी आवासों सहित कुल छह ठिकानों पर सघन छापेमारी की। इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्यों अहम है इस अधिकारी का सरकारी गवाह बनना?
जांचकर्ताओं का मानना है कि सरकारी विभागों के भारी-भरकम बजट को निजी बैंकों में जमा कराने, जाली फिक्स डिपॉजिट रिसीट (FDR) तैयार करने और फिर उस पैसे को फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर करने के खेल में कुछ शीर्ष अधिकारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध रही है। जिस आईएएस अधिकारी को गवाह बनाने की बात चल रही है, वे लंबे समय तक विकास एवं पंचायत राज विभाग में अहम पदों पर तैनात रहे हैं और वर्तमान में भी सिविल सचिवालय में एक मजबूत ओहदे पर हैं। पूर्व में हुई पूछताछ में इस अधिकारी से मिले अहम इनपुट के आधार पर ही सीबीआई अब अन्य आरोपियों के खिलाफ पुख्ता शिकंजा कसने की तैयारी में है।
नोएडा कनेक्शन और दो केंद्रीय एजेंसियों का साझा शिकंजा
सीबीआई की तफ्तीश में इस घोटाले के तार नोएडा की एक निजी कंपनी से भी जुड़े मिले हैं, जिसके ठिकानों को खंगाला गया है। शक है कि बैंकों से निकाला गया सरकारी पैसा पहले इस कंपनी के खाते में डंप किया गया और बाद में उसे टुकड़ों में निजी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। फिलहाल इस मामले की समानांतर जांच सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कर रही है। सीबीआई अब तक 13 मुख्य आरोपियों और दो फर्जी संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जिन अधिकारियों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है, उनमें मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, संकेत कुमार और डॉ. वैभव शर्मा जैसे नाम चर्चा में हैं। उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने पहले ही इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17ए के तहत सीबीआई को जांच को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी थी। अब देखना यह है कि नए सरकारी गवाह के कोर्ट में बयान दर्ज होने के बाद इस ₹661 करोड़ के खेल में और कितने सफेदपोशों के नाम सामने आते हैं।