590 करोड़ का आईडीएफसी घोटाला: इन विभागों के बड़े अफसरों तक पहुंची जांच, मचा हड़कंप
May 15, 2026 10:15 AM
हरियाणा। हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी (IDFC) बैंक घोटाले की जांच की आंच सीधे आईएएस अधिकारियों तक पहुंच गई। लंबे समय से फाइलों में दबे इस मामले में अब सीबीआई को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 5 सीनियर आईएएस अफसरों के खिलाफ जांच को मंजूरी दे दी है। इस कदम के बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसी इन रसूखदार अधिकारियों को समन जारी कर सीधे पूछताछ की मेज पर बैठा सकेगी।
इन विभागों में हुआ था 'खेल', रडार पर रहे बड़े पद
जांच के घेरे में आए ये अधिकारी उन विभागों से जुड़े हैं जहां सरकारी धन की बंदरबांट के सबसे ज्यादा आरोप लगे थे। सूत्रों की मानें तो इनमें पंचायत एवं विकास विभाग, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम पंचकूला और हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम में अहम पदों पर तैनात रहे अफसर शामिल हैं। गौरतलब है कि इस महाघोटाले की गंभीरता को देखते हुए सरकार पहले ही तीन लेखा अधिकारियों (Accounts Officers) को बर्खास्त कर चुकी है, लेकिन अब जांच का सिरा उन 'कलमों' तक पहुंच गया है जिन्होंने करोड़ों के फंड ट्रांसफर की फाइलों पर हस्ताक्षर किए थे।
आखिर क्यों देनी पड़ी जांच की मंजूरी? ये हैं पुख्ता आधार
सीबीआई ने सरकार के सामने जो दस्तावेज पेश किए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। जांच एजेंसी को कुछ ऐसी डिजिटल रिकॉर्डिंग्स और फाइल मूवमेंट के सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी की ओर इशारा करते हैं। बताया जा रहा है कि आरोपियों और इन अधिकारियों के बीच फंड ट्रांसफर और बैंक खातों के संचालन को लेकर हुई बातचीत के ऑडियो साक्ष्य भी एजेंसी के पास मौजूद हैं। इन्हीं तकनीकी सबूतों और गिरफ्तार आरोपियों के बयानों को आधार बनाकर सीबीआई ने 8 अफसरों की लिस्ट सौंपी थी, जिनमें से फिलहाल 5 के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है।
क्या है धारा 17-ए और अब आगे क्या होगा?
कानूनन किसी भी लोक सेवक के खिलाफ उसके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े फैसलों की जांच करने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है, जिसे धारा 17-ए कहा जाता है। सरकार से यह 'गो-अहेड' मिलने के बाद अब सीबीआई इन अधिकारियों की भूमिका की औपचारिक जांच शुरू करेगी। जानकार मानते हैं कि अगर पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं मिले, तो आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों का दौर भी शुरू हो सकता है। फिलहाल, शेष 3 अधिकारियों की फाइल भी सरकार के पास विचाराधीन है, जिस पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है।