हरियाणा में उद्योग लगाना हुआ आसान, सैनी सरकार ने अनुमति प्रक्रिया बदली
Mar 08, 2026 11:42 AM
हरियाणा में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए चंडीगढ़ से अहम फैसला सामने आया है। नायब सैनी सरकार ने हरियाणा शेड्यूल्ड रोड्स एंड कंट्रोल्ड एरिया रेस्ट्रिक्शन ऑफ अनरेगुलेटेड डेवलपमेंट एक्ट, 1963 में संशोधन लागू कर दिया है। नए प्रावधान के तहत अब नियंत्रित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों को अनुमति सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर भी मिल सकेगी, जिससे उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले तेज होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह संशोधन 13 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। सरकार का कहना है कि अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने से निवेशकों को बार-बार औपचारिकताओं से नहीं गुजरना पड़ेगा और नए उद्योग लगाने में समय की बचत होगी।
सेल्फ-सर्टिफिकेशन से मिलेगी अनुमति
संशोधित नियमों के अनुसार यदि कोई औद्योगिक इकाई नियंत्रित क्षेत्र के कनफॉर्मिंग जोन में स्थापित की जानी है, तो आवेदक सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर अनुमति के लिए आवेदन कर सकता है।
ऐसे मामलों में पारंपरिक अनुमति प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। आवेदक को केवल निर्धारित जानकारी राज्य सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।
जांच प्रक्रिया में भी होगी कमी
नए प्रावधान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी परियोजना को कनफॉर्मिंग जोन में सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर अनुमति मिलती है तो उस मामले में डायरेक्टर द्वारा अलग से जांच की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे मंजूरी प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और उद्योग लगाने की इच्छुक कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
निवेश और रोजगार पर पड़ सकता है असर
सरकार के अनुसार अनुमति प्रक्रिया में सरलता आने से राज्य में नई औद्योगिक परियोजनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। इससे औद्योगिक निवेश बढ़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बनने की संभावना है।
हरियाणा के कई औद्योगिक जिलों में पहले अनुमति प्रक्रिया लंबी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नए नियम लागू होने के बाद उद्योग लगाने की योजना बना रहे निवेशकों को अपेक्षाकृत तेजी से मंजूरी मिल सकेगी।
पुराने ऑर्डिनेंस को किया निरस्त
इस संशोधन के साथ सरकार ने पहले जारी हरियाणा शेड्यूल्ड रोड्स एंड कंट्रोल्ड एरिया रेस्ट्रिक्शन ऑफ अनरेगुलेटेड डेवलपमेंट (संशोधन) ऑर्डिनेंस, 2025 को भी निरस्त कर दिया है।सरकार ने स्पष्ट किया है कि उस ऑर्डिनेंस के तहत पहले जो भी फैसले या कार्रवाई की गई थी, उन्हें नए कानून के तहत वैध माना जाएगा।