पानीपत ESI अस्पताल में करोड़ों का घोटाला: सीएम सैनी ने दी ACB जांच की मंजूरी, तीन कर्मचारी सस्पेंड
Apr 22, 2026 5:36 PM
पानीपत। हरियाणा सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत अब पानीपत का ईएसआई अस्पताल निशाने पर आ गया है। पिछले चार सालों से अस्पताल की नाक के नीचे चल रहे करोड़ों के रेफरल घोटाले पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच का जिम्मा 'एंटी करप्शन ब्यूरो' (ACB) को सौंपते हुए साफ कर दिया है कि सरकारी खजाने और गरीब मरीजों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में प्राथमिक जांच के बाद अस्पताल के तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कैसे खेला गया भ्रष्टाचार का खेल?
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। साल 2020 से 2024 के बीच, अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने निजी (पैनल) अस्पतालों के साथ मिलकर एक मजबूत नेक्सस तैयार कर लिया था। मरीजों को बिना किसी गंभीर जरूरत के निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था। इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए डॉक्टरों के जाली हस्ताक्षरों का सहारा लिया गया और जाली रेफरल फॉर्म तैयार किए गए। इस खेल के पीछे का असली मकसद निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाना और बदले में सरकारी धन का बंदरबांट करना था।
प्रदेशव्यापी जांच के घेरे में 133 अस्पताल
मुख्यमंत्री ने केवल पानीपत तक ही सीमित न रहकर, इस घोटाले की जड़ें खोदने के लिए प्रदेश के अन्य 133 पैनल अस्पतालों के रिकॉर्ड की भी गहनता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। सरकार को अंदेशा है कि यह नेटवर्क पूरे प्रदेश में सक्रिय हो सकता है। बता दें कि पानीपत शहरी विधायक प्रमोद विज ने इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाते हुए सरकार का ध्यान इस बड़े भ्रष्टाचार की ओर आकर्षित किया था, जिसके बाद अब यह बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट का दावा: अब पारदर्शी हुई व्यवस्था
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वर्तमान मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. वंदना ने बताया कि दोषी कर्मचारियों पर शिकंजा कस दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब रेफरल प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं, जिससे किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अब अधिकांश मरीजों का इलाज अस्पताल के भीतर ही सुनिश्चित किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि अस्पताल के वार्ड अब मरीजों से भरे रहते हैं और रेफरल की संख्या में भारी गिरावट आई है। हालांकि, एसीबी की जांच में कई बड़े चेहरों और निजी अस्पतालों के मालिकों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।