हरियाणा में पानी का महा-प्लान: ₹3000 करोड़ से बदलेगी 3 जिलों की सूरत, सीएम सैनी ने किया MoU
Mar 21, 2026 1:21 PM
हरियाणा। हरियाणा में जल संकट की चुनौती को जड़ से खत्म करने की दिशा में शुक्रवार (20 मार्च 2026) का दिन एक बड़े मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के साथ हाथ मिलाते हुए ₹3,000 करोड़ के निवेश वाले 'जल जीवन मिशन 2.0' पर मुहर लगा दी है। यह समझौता केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि दक्षिण हरियाणा के उन रेतीले इलाकों के लिए 'संजीवनी' माना जा रहा है, जहाँ दशकों से माताएं-बहनें पानी के एक-एक घड़े के लिए मीलों का सफर तय करती आई हैं।
नूंह, पलवल और महेंद्रगढ़ पर विशेष नजर: स्टोरेज टैंकों का होगा कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस योजना का केंद्र बिंदु नूंह, पलवल और महेंद्रगढ़ जैसे जिले होंगे, जो भौगोलिक कारणों से जल संकट का सामना कर रहे हैं। योजना के तहत इन जिलों में विशालकाय वॉटर स्टोरेज टैंकों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि मानसून के दौरान संचित किए गए पानी का उपयोग भीषण गर्मियों में किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य उन परिवारों तक पाइपलाइन पहुंचाना है, जो भौगोलिक जटिलताओं के कारण पहले चरण में छूट गए थे।
गुणवत्ता से समझौता नहीं: मोबाइल टेस्टिंग वैन और हाईटेक लैब का जाल
'जल जीवन मिशन 2.0' केवल पाइप बिछाने तक सीमित नहीं है। सीएम सैनी ने जोर देकर कहा कि अब सरकार का ध्यान पानी की गुणवत्ता पर है। इसके लिए प्रदेश के सभी 23 जिलों में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। इतना ही नहीं, दूर-दराज के गांवों में पानी की शुद्धता जांचने के लिए मोबाइल टेस्टिंग वैन तैनात की जाएंगी, जो मौके पर ही आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों की जांच करेंगी। मुख्यमंत्री ने इसे एक 'जन आंदोलन' का रूप देने की अपील की है ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
'विश्वास' पोर्टल से खत्म होगा भ्रष्टाचार और देरी का खेल
इस परियोजना को पारदर्शी बनाने के लिए 'विश्वास' (BISWAS) पोर्टल को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ताओं को न केवल डिजिटल बिलिंग की सुविधा मिलेगी, बल्कि पानी की लीकेज या किल्लत से जुड़ी शिकायतों का निपटारा भी एक तय समय सीमा के भीतर होगा। 2028 तक चलने वाले इस मिशन का उद्देश्य हरियाणा को देश का ऐसा पहला राज्य बनाना है जहाँ पानी की उपलब्धता और प्रबंधन दोनों ही विश्व स्तरीय हों।