हरियाणा में किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए सुरक्षा कवच
Mar 08, 2026 1:55 PM
हरियाणा। हरियाणा सरकार ने खेती-किसानी से जुड़े जोखिमों को देखते हुए किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए ‘मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना’ लागू की है। चंडीगढ़ से जारी जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत खेत या मंडी में काम करते समय दुर्घटना होने पर पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है। नायब सिंह सैनी सरकार ने हाल ही में इसमें बदलाव करते हुए आयु सीमा की शर्त भी खत्म कर दी है, जिससे अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा।
इस फैसले का सीधा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा जिनकी आजीविका खेती और मजदूरी पर निर्भर है। दुर्घटना की स्थिति में मिलने वाली आर्थिक मदद परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
आयु सीमा खत्म, अब ज्यादा लोग होंगे पात्र
प्रदेश सरकार ने योजना के दायरे को बढ़ाते हुए आयु सीमा की बाध्यता समाप्त कर दी है। पहले कुछ आयु वर्ग के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता था।
अब 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग भी इस योजना के तहत सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेतों में काम करने वाले परिवारों के अधिक सदस्यों को सुरक्षा मिल पाएगी।
दुर्घटना की स्थिति में कितनी मिलेगी मदद
खेती-बाड़ी या मंडी में काम करते समय दुर्घटना होने पर सहायता राशि की अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं। मृत्यु की स्थिति में पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
स्थायी दिव्यांगता जैसे रीढ़ की हड्डी टूटने पर ढाई लाख रुपये तक की मदद दी जाती है। वहीं दो अंग कटने पर 1,87,500 रुपये और एक अंग कटने पर 1,25,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा चारों उंगलियां कटने पर 1,25,000 रुपये, पूरी उंगली कटने पर 75 हजार रुपये और उंगली का कुछ हिस्सा कटने पर 37,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
आवेदन के लिए 60 दिन की समय सीमा
इस योजना का लाभ लेने के लिए पीड़ित किसान या खेतिहर मजदूर को दुर्घटना के 60 दिनों के भीतर आवेदन करना जरूरी है। तय समय के बाद आवेदन करने पर सहायता राशि नहीं मिल सकेगी। आवेदन हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड (HSAMB) की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित क्षेत्र के सचिव के माध्यम से किया जा सकता है।
इन दस्तावेजों की जरूरत
आवेदन के समय कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। इनमें फैमिली आईडी, आधार कार्ड, पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट या पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बैंक पासबुक शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य खेती से जुड़े जोखिमों के बीच किसानों और मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा देना है, ताकि दुर्घटना के बाद परिवार को तत्काल राहत मिल सके।