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1500 करोड़ का वर्क स्लिप कांड: हरियाणा में 2 लाख मजदूरों में से 1.93 लाख निकले फर्जी, जांच तेज

Apr 02, 2026 10:21 AM

हरियाणा। चंडीगढ़ के गलियारों में इन दिनों श्रम विभाग का वो घोटाला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने सिस्टम की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिस 1500 करोड़ रुपये के संभावित वर्क स्लिप घोटाले की जांच के लिए वरिष्ठ आईएएस पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी, वह अपनी पहली समय सीमा यानी 31 मार्च को पार कर चुकी है। बजट सत्र और अफसरों की अन्य व्यस्तताओं का हवाला देते हुए जांच की रिपोर्ट को फिलहाल टाल दिया गया है। 1 अप्रैल को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक अब 3 अप्रैल को प्रस्तावित है, लेकिन जानकारों का कहना है कि घोटाले की परतें इतनी उलझी हुई हैं कि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी 15 दिन का समय और लग सकता है।

अनिल विज के 'छापे' ने खोली थी पोल, आंकड़ों ने चौंकाया

इस महाघोटाले की नींव तब हिली जब तत्कालीन गृह एवं वर्तमान श्रम मंत्री अनिल विज ने खुद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। विज की सख्ती के बाद जब हिसार, कैथल, जींद और सिरसा जैसे जिलों में शुरुआती पड़ताल हुई, तो जो आंकड़े सामने आए वो होश उड़ाने वाले थे। जांच में पता चला कि अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच जारी की गई वर्क स्लिप्स (काम का प्रमाण) में से महज 10 प्रतिशत ही सही थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई गांवों में तो पूरे के पूरे कुनबे ने ही फर्जी तरीके से मजदूर बनकर पंजीकरण करा लिया, ताकि सरकारी योजनाओं का पैसा डकारा जा सके।

मजदूरों के नाम पर 'कागजी फौज', 90% निकले फर्जी

जांच कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन 1.93 लाख फर्जी मजदूरों की पहचान करना है, जिनका अस्तित्व सिर्फ फाइलों में है। 13 जिलों की गहन जांच में सामने आया कि कुल 2 लाख 21 हजार 517 मजदूरों के नाम पोर्टल पर दर्ज थे, लेकिन जब धरातल पर वेरिफिकेशन हुआ तो सिर्फ 14,240 चेहरे ही असली निकले। शेष पौने दो लाख से ज्यादा नाम पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसी तरह, करीब 6 लाख वर्क स्लिप्स में से 5.46 लाख स्लिप गलत पाई गईं। यह आंकड़ा चीख-चीख कर कह रहा है कि विभाग के भीतर मिलीभगत का जाल कितना गहरा बुना गया था।

अब डीसी की रिपोर्ट पर टिकी नजरें, सुधारात्मक उपायों की तैयारी

आईएएस पंकज अग्रवाल, राजीव रतन और आईपीएस पंकज नैन की यह कमेटी अब राज्य के सभी 22 जिलों पर अपना फोकस बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बाकी 9 जिलों से भी विस्तृत इनपुट मांगे गए हैं। कमेटी ने सभी जिलों के डीसी को नई और सटीक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। जांच का दायरा केवल दोषियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है; कमेटी यह भी सिफारिश करेगी कि भविष्य में इस तरह के 'डिजिटल सेंधमारी' को कैसे रोका जाए। हालांकि, अफसरों की बैठकों और बजट सत्र की दुहाई के बीच आम जनता और असली हकदार मजदूर इस इंतजार में हैं कि कब इस 1500 करोड़ की लूट का असली सच सामने आएगा।

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