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Karnal News: पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में फिर बवाल, लाठी-डंडे चलने के बाद 6.11 लाख की लूट का आरोप

May 20, 2026 1:39 PM

करनाल। करनाल के घरौंडा की नई अनाज मंडी में आयोजित पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सोमवार को कथा स्थल उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जब वीआईपी पास को लेकर दो गुट आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि लाठी-डंडों से लैस दर्जनों युवकों ने पंडाल के भीतर बने मुख्य दान कार्यालय (डोनेशन ऑफिस) पर हमला बोल दिया। इस दौरान वहां जमकर तोड़फोड़ की गई, जिससे पूरे पंडाल में भगदड़ और चीख-पुकार मच गई।

पास वितरण में 'बंदरबांट' का आरोप, दूसरा पक्ष बोला- लूट की कहानी झूठी

घटना के बाद शिकायत दर्ज कराने पुलिस थाने पहुंचे श्रद्धालुओं के एक गुट ने आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वीआईपी एंट्री पास को लेकर आयोजन समिति के लोग अपनों को फायदा पहुंचा रहे हैं और आम भक्तों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। इसी भेदभाव के चलते आम जनता का गुस्सा भड़का। हालांकि, थाने पहुंचे लोगों ने दान कार्यालय में लूटपाट के आरोपों को पूरी तरह सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आयोजक अपनी कमियों और अव्यवस्था को छिपाने के लिए लूट की झूठी कहानी गढ़ रहे हैं।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कुछ युवक हाथों में डंडे लेकर दफ्तर में तोड़फोड़ करते और मारपीट करते साफ दिखाई दे रहे हैं।

पुलिसिया कार्रवाई: घरौंडा थाना प्रभारी दीपक कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें एक पक्ष (आयोजकों) की तरफ से 6.11 लाख रुपये की नकदी गायब होने और मारपीट की लिखित शिकायत मिली है। पुलिस सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर हमलावरों की शिनाख्त कर रही है। कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और आस्था के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

पुराना है विवादों का नाता: पहले भी बंद करनी पड़ी थी कथा

यह पहला मौका नहीं है जब घरौंडा की इस कथा में इस तरह का हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला हो। इससे ठीक कुछ दिन पहले भी यहां बड़ा हंगामा हुआ था। उस समय मुख्य पंडाल में आए अन्य सहायक पंडितों और कथा से जुड़े स्टाफ को पैसे देने (भुगतान) के मामले पर आयोजकों और स्थानीय प्रबंधन में लात-घूंसे चल गए थे। उस विवाद के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा को बीच में ही रद्द कर दिया था। हालांकि, बाद में मान-मनौव्वल और स्थानीय प्रशासन के दखल के बाद इसे दोबारा शुरू कराया गया, लेकिन वीआईपी कल्चर की होड़ ने एक बार फिर पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

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