हरियाणा में नहीं होगी गैस की किल्लत: CM सैनी ने पैनिक बुकिंग और अफवाहों पर लगाया विराम
Mar 13, 2026 10:56 AM
हरियाणा। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय बाजारों में यह चर्चा आम थी कि आने वाले दिनों में एलपीजी सिलेंडर मिलना मुश्किल हो जाएगा। पैनिक बुकिंग के चलते कुछ जगहों पर नियमों में बदलाव की बातें भी सामने आईं, जैसे कि दूसरा सिलेंडर अब 25 दिनों के बाद ही मिलेगा। हालांकि, हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। सरकार के अनुसार, घरेलू सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में कोई स्थायी बाधा नहीं है।
कमर्शियल सप्लाई में 'अस्थायी' रुकावट, अस्पतालों को प्राथमिकता
भले ही घरेलू गैस की स्थिति नियंत्रण में हो, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई में कुछ चुनौतियां देखी जा रही हैं। सरकार ने स्वीकार किया है कि व्यावसायिक उपयोग वाले सिलेंडरों की आपूर्ति में अस्थायी तौर पर कुछ दिक्कतें आई हैं।
इस संकट के प्रबंधन के लिए प्रशासन ने एक प्राथमिकता सूची तैयार की है:
अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र: सबसे पहली प्राथमिकता चिकित्सा सेवाओं को दी जा रही है। शिक्षण संस्थान: स्कूलों और कॉलेजों के हॉस्टल्स को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है। सामान्य कमर्शियल उपयोग: होटल और रेस्टोरेंट जैसे क्षेत्रों में सप्लाई को धीरे-धीरे सुधारा जा रहा है।
कालाबाजारी पर सरकार की टेढ़ी नजर
गैस संकट की आहट मिलते ही जमाखोर सक्रिय हो जाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला उपायुक्तों (DC) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई एजेंसी या व्यक्ति सिलेंडरों की कालाबाजारी या अवैध भंडारण करता पाया गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
तेल कंपनियों के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि डिपो में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का स्टॉक पर्याप्त है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे घबराहट में आकर 'पैनिक बाइंग' न करें, क्योंकि अनावश्यक भंडारण से ही बाजार में कृत्रिम कमी (Artificial Scarcity) पैदा होती है।
क्या है मौजूदा संकट की वजह?
दरअसल, ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों पर खतरा मंडरा रहा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं रास्तों के जरिए खाड़ी देशों से आयात करता है। आपूर्ति में देरी की आशंका ने ही देशभर में इस तरह के डर का माहौल बनाया है।